07/08/25 | 2:23 pm

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आधुनिक परीक्षा प्रणाली की ओर बिहार, 9 शहरों में तैयार हो रहे आदर्श केंद्र

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने राज्य में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और छात्रों के अनुकूल बनाने के लिए ‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ की स्थापना की है। यह पहल 22 मार्च 2025 को औपचारिक रूप से शुरू हुई थी। अब तक पटना, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, गया, सहरसा और मुंगेर सहित कुल 9 शहरों में इन अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त परीक्षा केंद्र सक्रिय हो चुके हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिहार में पुरानी परीक्षा संबंधी समस्याओं को दूर करना है, जैसे कि अस्थायी परीक्षा व्यवस्था, अव्यवस्थित प्रबंधन, सीमित सीटें और बड़े पैमाने पर नकल व अन्य अनुचित गतिविधियां। परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे स्थायी और तकनीकी रूप से मजबूत ‘आदर्श परीक्षा केंद्र’ अब एक आवश्यक समाधान बन गए हैं।

बिहार में पारदर्शी और आधुनिक परीक्षा प्रणाली की दिशा में की गई एक बड़ी पहल के तहत ‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ की स्थापना की गई है

बिहार में पारदर्शी और आधुनिक परीक्षा प्रणाली की दिशा में की गई एक बड़ी पहल के तहत ‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ की स्थापना की गई है। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) और पेपर आधारित टेस्ट (PBT), दोनों प्रकार की परीक्षाओं की सुविधा से सुसज्जित इन ‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ में ISO-प्रमाणित इन्फ्रास्ट्रक्चर, एआई-सक्षम CCTV सिस्टम (जिसमें कोई ब्लाइंड स्पॉट नहीं होता), बायोमेट्रिक पंजीकरण और सुरक्षित प्रिंटिंग के लिए विशेष जोन, केंद्रीकृत रूप से नियंत्रित कमांड कंट्रोल रूम और अलग पर्यवेक्षक कक्ष जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। परीक्षार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं दी गई हैं, जैसे एयर कंडीशंड परीक्षा हॉल, बैठने के लिए पर्याप्त जगह, बैग रखने का स्थान और प्रतीक्षा कक्ष।

इन केंद्रों में परीक्षा देना न केवल आसान बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी हो गया है

इन सभी आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं के साथ, इन केंद्रों में परीक्षा देना न केवल आसान बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी हो गया है।इन केंद्रों में हाल ही में भारतीय नौसेना की अधिकारी भर्ती के लिए CDAC (Centre for Development of Advanced Computing) द्वारा आयोजित परीक्षा, साथ ही कई अन्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर की परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की गई हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि बिहार राज्य न केवल शैक्षणिक क्षेत्र बल्कि परीक्षा संचालन की पारदर्शिता एवं तकनीकी प्रगति में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

आदर्श परीक्षा केंद्रों’ में परीक्षाओं के संचालन को लेकर परीक्षार्थियों और पर्यवेक्षकों दोनों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है

‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ में परीक्षाओं के संचालन को लेकर परीक्षार्थियों और पर्यवेक्षकों दोनों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है। परीक्षा के दौरान उपस्थित एक पर्यवेक्षक ने कहा, “प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह अनुशासित, तकनीकी रूप से सक्षम और स्टाफ द्वारा अत्यंत कुशलता से संचालित रही।” वहीं, एक अभ्यर्थी ने साझा किया, “पहली बार किसी परीक्षा केंद्र में इतनी सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाएं मिलीं, जिससे परीक्षा का अनुभव बेहद सहज, पारदर्शी और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहा।”

आदर्श परीक्षा केंद्रों से परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ी, साथ ही युवाओं में विश्वास और सकारात्मकता भी आई है

इन ‘आदर्श परीक्षा केंद्रों’ के निर्माण से न केवल राज्य में परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, बल्कि युवाओं में परीक्षा को लेकर विश्वास और सकारात्मकता भी बढ़ी है। यह पहल बिहार सरकार की डिजिटलीकरण एवं सुशासन की नीति के अनुरूप है, जिसमें पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन केंद्रों की सफलता को देखते हुए आगे और जिलों में इसी मॉडल पर परीक्षा केंद्र विकसित किए जाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे राज्य भर में लगभग 14,000 सीटों की परीक्षा क्षमता विकसित हो सकेगी।

बिहार बोर्ड की यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रही है और पारदर्शी व सुरक्षित परीक्षा प्रणाली का राष्ट्रीय आदर्श बन रही है

इस पहल का एक अन्य प्रमुख पक्ष यह भी है कि इन केंद्रों के संचालन से राज्य के स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी स्टाफ, डेटा ऑपरेटर, सुरक्षा कर्मी और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े नए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे न केवल शिक्षा तंत्र को मजबूती मिली है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान हुआ है। ये केंद्र युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने, उन्हें प्रशिक्षित करने और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की यह क्रांतिकारी पहल न केवल राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-अनुकूल परीक्षा प्रणाली के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण भी स्थापित कर रही है।