स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एचआईवी/एड्स नियंत्रण को तेज करने के लिए दिल्ली में ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ का आयोजन किया। यह पहल राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के माध्यम से हरियाणा और दिल्ली में जिला स्तर पर एचआईवी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।
कार्यशाला की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक, NACO, डॉ. राकेश गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि एचआईवी अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और इसे नियंत्रित करने के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने वैश्विक 95:95:95 लक्ष्य का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य है—95% लोगों को अपनी एचआईवी स्थिति की जानकारी हो, 95% संक्रमित लोग उपचार पर हों और 95% मरीजों में वायरस का स्तर नियंत्रित हो। भारत अब इसे और आगे बढ़ाते हुए 95:95:99 लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
देशभर में 219 जिलों को एचआईवी नियंत्रण के लिए प्राथमिकता दी गई है, जिनमें हरियाणा के 11 और दिल्ली के 7 जिले शामिल हैं। दिल्ली में एचआईवी से पीड़ित लोगों का अनुमान लगभग 59 हजार है, जबकि हरियाणा में यह संख्या करीब 59,600 है।
कार्यशाला में जिला स्तर की टीमों ने अपनी प्रगति, चुनौतियां और आगे की रणनीतियां साझा कीं। इसका मुख्य फोकस टेस्टिंग बढ़ाना, मरीजों को इलाज से जोड़ना, उपचार जारी रखना और वायरस को नियंत्रित करना है।
डॉ. गुप्ता ने विशेष रूप से मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण रोकने पर जोर दिया और कहा कि समय पर जांच और उपचार से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
यह कार्यशाला डेटा आधारित और समन्वित रणनीति को मजबूत करने के साथ-साथ जागरूकता, उपचार और निगरानी तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार का लक्ष्य 2027 तक एचआईवी/एड्स को नियंत्रण में लाना और 2030 तक इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है।


