मध्य प्रदेश में उर्टन और धीरौली खदानों से शुरू हुआ कोयला उत्पादन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

मध्य प्रदेश में उर्टन और धीरौली कोयला खदानों से उत्पादन शुरू होने के साथ ही कोयला मंत्रालय ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इन खदानों के चालू होने से घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है।

उर्टन बनी पहली वाणिज्यिक भूमिगत कोयला खदान

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित उर्टन कोयला खदान का आवंटन JMS Mining Private Limited को किया गया है। इस खदान से 15 मई 2026 से कोयले का उत्पादन शुरू हो गया है। खास बात यह है कि वाणिज्यिक कोयला नीलामी प्रणाली के तहत उत्पादन शुरू करने वाली उर्टन देश की पहली भूमिगत कोयला खदान बन गई है। इसे कोयला क्षेत्र में सुधार आधारित बदलाव की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

सिंगरौली की धीरौली खदान से भी उत्पादन शुरू

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में स्थित धीरौली कोयला खदान में भी उत्पादन शुरू हो गया है। इस खदान का आवंटन Mahan Energen Limited को किया गया है। यहां 17 मई 2026 से कोयला उत्पादन शुरू हुआ है। माना जा रहा है कि इससे संसाधन संपन्न सिंगरौली क्षेत्र से कोयले की आपूर्ति और मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी गति

कोयला मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों खदानों से उत्पादन शुरू होना मंत्रालय द्वारा किए गए प्रगतिशील सुधारों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण का परिणाम है। इसका उद्देश्य परिचालन दक्षता बढ़ाना और व्यापार करने में सुगमता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का मानना है कि इन खदानों से बढ़ा हुआ उत्पादन घरेलू कोयले की बढ़ती मांग को पूरा करने, आयात पर निर्भरता घटाने और सतत आर्थिक विकास को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाएगा। (इनपुट: पीआईबी)