नीट-यूजी 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।
सुनवाई में केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के लाखों छात्रों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की एनटीए पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक व्यक्तिगत स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक परीक्षा प्रणाली में होने वाली गड़बड़ियां नहीं रुकेंगी।
जवाबदेही तय करने पर जोर
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि केवल संस्थागत जिम्मेदारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी है और वह किस स्तर पर जवाबदेह है।
छात्रों के हितों पर अदालत की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा विवादों का असर छात्रों और उनके परिवारों पर गहरा पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और उम्मीदों के साथ इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
एनटीए की कार्यशैली पर सवाल
अदालत ने एनटीए की कार्यशैली को ‘एड-हॉक’ बताते हुए कहा कि देश की परीक्षा संस्थाओं को अधिक मजबूत और स्थायी ढांचे के साथ काम करना चाहिए, ताकि बार-बार विवाद की स्थिति न बने।
यूपीएससी मॉडल का उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि एनटीए को उससे सीख लेनी चाहिए, जिसने लंबे समय से बड़ी परीक्षाओं को अपेक्षाकृत विवाद-रहित तरीके से आयोजित किया है।
सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
कोर्ट ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह एनटीए की संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी घटनाएं दोबारा न हों। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। (इनपुट: आईएएनएस)


