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बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप भारत की सांख्यिकी प्रणाली का व्यापक आधुनिकीकरण

तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं को भारत की सांख्यिकी प्रणाली में बेहतर ढंग से समझने के लिए व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अंतिम आधार वर्ष (2011-12) के बाद से एक दशक में देश में कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव हुए हैं, सेवा क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत औपचारिकीकरण बढ़ा है और डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने बिजनेस मॉडल को बदला है। इन बदलावों ने यथासमय संकेतकों, अधिक सटीक भौगोलिक विवरण और अनौपचारिक एवं सेवा क्षेत्रों में बेहतर कवरेज की मांग को जन्म दिया है। इसके उत्तर में, सरकार ने राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली के व्यापक आधुनिकीकरण के तहत समन्वित सुधारों की शुरुआत की है, जिनका उद्देश्य आंकड़ों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और नीतिगत प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना है।

इसके अंतर्गत प्रमुख सुधारों में जीडीपी और मूल्य संबंधी सूचकांकों के आधार वर्षों का आगामी संशोधन, अनौपचारिक और सेवा संबंधी अर्थव्यवस्था के मापन में सुधार, श्रम बाजार सांख्यिकी में बढ़ोतरी, सर्वेक्षण विधियों और प्रौद्योगिकी में विस्तृत नवाचार और हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने के कदम शामिल हैं।

ये सभी सुधार मिलकर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए भारत के आधिकारिक आंकड़ों की समयबद्धता, सटीकता और विश्वसनीयता में सुधार लाने के लिए तैयार हैं।

राष्ट्रीय लेखा में आधार वर्ष का संशोधन

आधार वर्ष का नियमित अद्यतन यह सुनिश्चित करता है कि GDP और अन्य प्रमुख आर्थिक सूचकांक वर्तमान आर्थिक संरचना और सापेक्ष कीमतों को प्रतिबिंबित कर सकें। समय के साथ उत्पादन संरचना, उपभोग पैटर्न और निवेश व्यवहार में बदलाव होते हैं, जिन्हें सही रूप में दर्शाने के लिए आधार वर्ष का संशोधन आवश्यक होता है।

यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप होती है और संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित कार्यप्रणालियों के साथ तालमेल सुनिश्चित करती है। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपूर्ति-इस्तेमाल तालिकाओं (Supply-Use Tables) और अन्य आधुनिक आर्थिक गतिविधियों के मापन में भारत के आंकड़े वैश्विक स्तर पर तुलनीय बने रहते हैं।

GDP श्रृंखला में आधार वर्ष का संशोधन

GDP अनुमानों के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 किया जा रहा है। पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं जैसे नए उद्योगों का उभार और उपभोग एवं निवेश के स्वरूप में बदलाव शामिल है।

व्यापक डिजिटलीकरण के चलते प्रशासनिक डेटा के नए स्रोत उपलब्ध हुए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय लेखा में शामिल करने से अनुमानों की सटीकता और विस्तार में सुधार होगा। ई-वाहन पंजीकरण, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और GST जैसे डेटाबेस अब त्वरित समय पर विस्तृत आर्थिक जानकारी प्रदान करते हैं।

GDP का संकलन व्यय तथा उत्पादन/आय पद्धतियों के आधार पर किया जाता रहेगा। हालांकि, मौजूदा ढांचे में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं किया गया है, लेकिन कार्यप्रणाली में सुधार कर नॉमिनल और वास्तविक दोनों ही अनुमानों की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा रहा है।

2022-23 को आधार वर्ष के रूप में चुनने का औचित्य

वर्ष 2022-23 को नया आधार वर्ष इसलिए चुना गया है क्योंकि यह कोविड-19 महामारी से उत्पन्न असाधारण व्यवधानों के बाद का सबसे हालिया “सामान्य” वर्ष है। वर्ष 2019-20 और 2020-21 में महामारी के कारण उपभोग, उत्पादन और निवेश के पैटर्न अस्थायी रूप से प्रभावित हुए थे, जिससे वे आधार वर्ष के रूप में उपयुक्त नहीं थे।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का आधार वर्ष संशोधन

CPI मुद्रास्फीति का एक प्रमुख संकेतक है, जो ग्रामीण और शहरी परिवारों के उपभोग पैटर्न को दर्शाता है। CPI श्रृंखला को 2024 को नया आधार वर्ष बनाकर संशोधित किया जा रहा है।

इस संशोधन में घरेलू खपत व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के आंकड़ों का उपयोग किया गया है, जिससे उपभोग बास्केट और व्यय भार वर्तमान वास्तविकताओं के अनुरूप हो सकें। इसका उद्देश्य CPI अनुमानों की सटीकता, पारदर्शिता और नीतिगत प्रासंगिकता को मजबूत करना है।

CPI आधार संशोधन की प्रक्रिया 2023 में RBI, प्रमुख मंत्रालयों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ अधिकारियों वाले एक विशेषज्ञ समूह के मार्गदर्शन में शुरू की गई थी। इसमें नमूना सत्यापन, बाजारों की पहचान और आधार मूल्यों के संग्रह जैसी बहु-चरणीय प्रक्रिया अपनाई गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का संशोधन

IIP एक मासिक सूचक है, जो औद्योगिक उत्पादन में समय के साथ होने वाले बदलाव को मापता है। यह GDP में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA) का अनुमान लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है।

तकनीकी नवाचार, नए उत्पादों और औद्योगिक संरचना में बदलाव के कारण IIP के आधार वर्ष को 2022-23 तक संशोधित किया जा रहा है। इस संशोधन के तहत मद भारों को अपडेट किया जा रहा है, क्षेत्रीय कवरेज को बेहतर बनाया जा रहा है और राष्ट्रीय लेखा के नए आधार वर्ष के साथ संरेखण सुनिश्चित किया जा रहा है।

नई श्रृंखलाओं की समयरेखा

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने नई श्रृंखलाओं के विमोचन की स्पष्ट समयरेखा घोषित की है:

GDP नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23): 27 फरवरी 2026

CPI नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2024): 12 फरवरी 2026

IIP नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23): 28 मई 2026

इन अपडेट से आर्थिक नीति, मौद्रिक प्रबंधन और व्यवसायिक निर्णयों में बेहतर जानकारी आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी।

अनौपचारिक और सेवा क्षेत्र का सुदृढ़ मापन

अनौपचारिक और सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इनके मापन को मजबूत करने के लिए नए सर्वेक्षण ढांचे, प्रायोगिक अध्ययन और विशेषज्ञ परामर्श को अपनाया गया है।

असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE)

ASUSE असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र का आकलन करता है, जो रोजगार और स्थानीय उद्यमशीलता का प्रमुख स्रोत है।

सेवा क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASSSE)

सेवा क्षेत्र GDP का लगभग 50 प्रतिशत योगदान देता है। निगमित सेवा क्षेत्र के विस्तृत आंकड़ों की कमी को दूर करने के लिए ASSSE के तहत प्रायोगिक अध्ययन किया गया, जिसके आधार पर विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई है।

त्रैमासिक बुलेटिन (QUBUSE) की शुरुआत

2025 से असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन (QUBUSE) शुरू किए गए हैं। ये बुलेटिन वार्षिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा के बजाय प्रत्येक तिमाही में अंतरिम अनुमान प्रदान करते हैं, जिससे अल्पकालिक आर्थिक गतिविधियों की बेहतर समझ संभव हो पाती है।

श्रम बाजार सांख्यिकी में सुधार (PLFS)

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है। 2025 में इसमें कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

जनवरी 2025 से राष्ट्रीय स्तर पर मासिक श्रम सूचकों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए त्रैमासिक अनुमान और चयनित राज्यों के लिए राज्य-स्तरीय आंकड़े भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जिला स्तर पर आंकड़ों की उपलब्धता

जनवरी 2025 से राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) में जिले को मूल सांख्यिकीय इकाई के रूप में अपनाया गया है। इससे जिला और उप-जिला स्तर पर नीति निर्माण और योजना को बल मिला है।

डिजिटलीकरण और त्वरित-समय डेटा सत्यापन

NSS सर्वेक्षण अब e-Sigma प्लेटफॉर्म के माध्यम से Computer Assisted Personal Interview (CAPI) पद्धति से किए जा रहे हैं। इसमें अंतर्निहित सत्यापन, त्वरित-समय डेटा अपलोड और बहुभाषी इंटरफेस जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इन पहलों से डेटा प्रकाशन की समयसीमा में उल्लेखनीय कमी आई है। वार्षिक परिणाम अब 90–120 दिनों में और मासिक परिणाम 15–30 दिनों में जारी किए जा रहे हैं।

डेटा प्रसार और सार्वजनिक पहुंच

डेटा संग्रह के साथ-साथ डेटा प्रसार को भी आधुनिक बनाया गया है। जून 2025 में लॉन्च किया गया GoIStats मोबाइल ऐप नागरिकों को कहीं भी, कभी भी आधिकारिक आंकड़ों तक पहुंच प्रदान करता है।

ई-सांख्यिकी पोर्टल में 136 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड और 772 संकेतक शामिल हैं, जो विभिन्न मंत्रालयों और RBI के आंकड़ों को एकीकृत करता है। इसके अतिरिक्त, नया माइक्रोडाटा पोर्टल शोधकर्ताओं को इकाई-स्तरीय डेटा तक सुरक्षित पहुंच प्रदान करता है।

हालिया सांख्यिकीय सुधारों ने भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली को अधिक प्रासंगिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया है। GDP, CPI और IIP के आधार वर्षों का संशोधन, अनौपचारिक और सेवा क्षेत्रों के बेहतर मापन, श्रम बाजार सुधार और डिजिटल डेटा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, सभी मिलकर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं।

ये पहलें न केवल अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हैं, बल्कि विकेंद्रीकृत योजना, प्रभावी शासन और सूचित सार्वजनिक विमर्श को भी सशक्त बनाती हैं, जिससे भारत की आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनी रहती है।