केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार को नई दिल्ली में Navigyaan 2026 के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) के इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर प्रोजेक्ट की प्रभाव रिपोर्ट जारी की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को केवल उन्नत तकनीकों का बड़ा बाजार बनने के बजाय उनका विकास, निर्माण और निर्यात करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
कुमारस्वामी ने बताया कि भारी उद्योग मंत्रालय की भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के दूसरे चरण के तहत 1,207 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत साझा तकनीक विकास और सेवा बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए 33 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इसी पहल के तहत MHI इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर कार्यक्रम को 10 तकनीकों के विकास के लिए 35.72 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसका उद्देश्य इन तकनीकों को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (TRL) 3 से TRL-9 तक पहुंचाना था। मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम के जरिए शुरुआती स्तर के नमूनों से आगे बढ़कर व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पाद विकसित करने में मदद मिली।
कार्यक्रम के तहत भविष्य की परिवहन तकनीकों से जुड़े कई क्षेत्रों पर काम किया गया, जिनमें इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, उच्च-वोल्टेज मोटर नियंत्रण और ऊर्जा भंडारण शामिल हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि भारत को ऐसी तकनीकों को देश में विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक के विकास के लिए सरकार, उद्योग, शोध संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और ARAI जैसी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। सरकार नीतिगत ढांचा और लक्षित सहायता उपलब्ध करा सकती है, जबकि उद्योग बाजार की जरूरतों और विनिर्माण क्षमता को मजबूत करता है। शोध एवं शिक्षण संस्थान ज्ञान और तकनीक उपलब्ध कराते हैं तथा स्टार्टअप नए विचारों और तेजी से काम करने की क्षमता को बढ़ावा देते हैं।
मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब केवल आयात का विकल्प तैयार करना नहीं है। इसके तहत भारतीय बौद्धिक संपदा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और कुशल मानव संसाधन विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने उभरती तकनीकी जरूरतों की पहचान करने और उद्योग-शिक्षा जगत के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
कुमारस्वामी ने कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में भारत का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए—देश में शिक्षा, नवाचार, विनिर्माण और तकनीकों के एकीकरण को बढ़ावा देना तथा भारतीय तकनीकों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना। उन्होंने कहा कि ऐसा मजबूत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिससे भारतीय नवाचार का सफर विचार से नमूने, नमूने से उत्पाद और उत्पाद से वैश्विक बाजार तक तेजी से पूरा हो सके।
इस अवसर पर मंत्री ने MHI इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर प्रोजेक्ट से जुड़े सदस्यों को सम्मानित भी किया। ARAI-AMTIF द्वारा लागू इस परियोजना के समापन कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, शोध क्षेत्र और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कुमारस्वामी ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का भी दौरा किया और एक्सेलेरेटर कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों की जानकारी ली। प्रदर्शनी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, उच्च-वोल्टेज प्रणाली, ऊर्जा भंडारण, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव, सेंसर और उन्नत सतह तकनीक से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए गए।
-(इनपुटः PIB)


