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सरकारी खरीद में डिजिटल क्रांति, जीईएम का GMV एक दशक में 422 करोड़ से बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपये

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने सार्वजनिक खरीद की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले जहां इस प्लेटफॉर्म का सकल व्यापारिक मूल्य (जीएमवी) केवल 422 करोड़ रुपए था, वहीं आज यह बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए एक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीईएम आज देश में पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और डिजिटल सरकारी खरीद प्रणाली का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं, जिनमें 2.25 लाख से ज्यादा महिला उद्यमियों द्वारा संचालित इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा 42,000 से अधिक स्टार्टअप्स भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता है।

उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है, बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित की है, खरीद प्रक्रिया की अवधि को कम किया है, सरकार के लिए बड़ी बचत पैदा की है और एंड-टू-एंड डिजिटल खरीद प्रक्रिया के माध्यम से जवाबदेही को मजबूत किया है।”

मंत्री ने बताया कि जीईएम ने सरकारी खरीद बाजार को एमएसएमई, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), कारीगरों और बुनकरों के लिए अधिक सुलभ बनाया है। साथ ही यह ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को भी मजबूती दे रहा है।

उन्होंने कहा कि जीईएम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है और ‘विकसित भारत’ की नींव को मजबूत कर रहा है।

वर्ष 2016 में शुरू किया गया जीईएम अब अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठनों को लगभग 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है।

एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, जीईएम अब केवल खरीद-बिक्री का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत के डिजिटल प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। पोर्टल पर 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं की जरूरतें पूरी की जाती हैं।

सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और व्यापक भागीदारी के जरिए जीईएम को और अधिक स्मार्ट एवं एकीकृत बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।

(इनपुट-आईएएनएस)

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