एसएमसी दिशानिर्देशों पर शिक्षा मंत्रालय की स्पष्टता, सभी स्कूलों पर लागू नहीं होंगे नियम

शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशानिर्देश 2026 की विभिन्न प्रकार से संचालित विद्यालयों पर प्रयोज्यता को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 2(एन)(iv) के तहत आने वाले ऐसे विद्यालय, जो संचालन संबंधी जरूरतों के लिए सरकार या स्थानीय प्राधिकरण से किसी प्रकार की सहायता नहीं लेते, वे इन दिशानिर्देशों के दायरे में नहीं आएंगे।

सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए जारी हुए थे दिशानिर्देश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 6 मई 2026 को विद्यालय प्रबंधन समिति दिशानिर्देश 2026 जारी किए थे। इनका उद्देश्य स्कूली शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना, विकेंद्रीकृत और सहभागी विद्यालय प्रशासन को बढ़ावा देना तथा बच्चों के हितों को प्राथमिकता देते हुए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करना है। दिशानिर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों के समग्र शैक्षणिक कामकाज में सुधार लाना और सभी हितधारकों को साथ जोड़कर विद्यालयों के प्रति सामुदायिक दायित्व की भावना विकसित करना भी है।

विभिन्न वर्गों से मिली थीं आपत्तियां और सुझाव

मंत्रालय को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के संदर्भ में विभिन्न प्रकार से संचालित विद्यालयों पर इन दिशानिर्देशों की प्रयोज्यता को लेकर समाज के कुछ वर्गों से अभ्यावेदन और चिंताएं प्राप्त हुई थीं। इन सुझावों और आपत्तियों पर विचार-विमर्श के बाद मंत्रालय ने 20 मई 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की।

सहायता नहीं लेने वाले विद्यालय होंगे बाहर

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 2(एन)(iv) में उल्लिखित विद्यालय, यदि वे सरकार या स्थानीय निकाय से संचालन संबंधी कोई सहायता नहीं लेते हैं, तो एसएमसी दिशानिर्देश 2026 के अंतर्गत नहीं आएंगे। हालांकि, मंत्रालय ने ऐसे विद्यालयों को भी पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय प्रबंधन समितियां गठित करने हेतु प्रोत्साहित किया है।

शिक्षा को बताया साझा दायित्व

शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सरकार, विद्यालय, अभिभावकों और समुदाय का साझा दायित्व है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालयों के कामकाज में सुधार और बच्चों के बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के बीच सहयोग और तालमेल आवश्यक है। (इनपुट: पीआईबी)