02/09/26 | 1:58 pm

Print

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड के दौरे पर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक आधिकारिक यात्रा पर यूक्रेन और पोलैंड जाएंगे। इस दौरे के दौरान वे यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ बैठक और बातचीत करेंगे।विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी रुचि के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।

26 अगस्त की फोन वार्ता के बाद हो रहा है यह दौरा

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की यह यात्रा 26 अगस्त को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा के साथ हुई टेलीफोन वार्ता के बाद हो रही है। उस बातचीत के दौरान सिबीहा ने उन्हें ब्लैक सी (काला सागर) की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी थी और वहां समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को बहाल करने के तरीकों पर चर्चा की थी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ब्लैक सी क्षेत्र आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील हो गया है। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के व्यापारिक जहाजों, बंदरगाहों और ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमले कर रहे हैं।

सिबीहा का बयान: वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर खतरा

एंड्री सिबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मेरी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ फोन पर बातचीत हुई। मैंने उन्हें यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामक कार्रवाई और हमारे बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों पर बढ़े हमलों के कारण काला सागर में पैदा हुई कठिन स्थिति के बारे में जानकारी दी।”
उन्होंने कहा कि ब्लैक सी में जहाजों पर हो रहे हमले केवल यूक्रेन के खाद्य निर्यात को प्रभावित नहीं करते, बल्कि दुनियाभर के लाखों परिवारों को भी प्रभावित कर सकते हैं। सिबीहा ने जोर दिया कि यूक्रेन के खाद्य निर्यात को बाधित करने की रूस की कोशिशें वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इसका असर क्षेत्र से कहीं आगे तक जाता है। 

उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच ब्लैक सी में सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री आवाजाही बहाल करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। साथ ही यूक्रेन-भारत द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के लिए लाभकारी एजेंडे पर काम करने के तरीकों पर बात की गई। आने वाले संपर्कों को लेकर समन्वय किया गया और करीबी संवाद बनाए रखने पर सहमति बनी।

डॉ. जयशंकर का रुख: संवाद और कूटनीति का समर्थनविदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति का समर्थक रहा है। यह दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। (इनपुट-एजेंसी)

RELATED ARTICLES

35 mins ago | China

ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद चीन रवाना हुए शी जिनपिंग

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज रविवार को चीन रवाना हो...

1 hour ago | BRICS Summit

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का दुनियाभर में आम लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है : ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का दुनियाभर में आम लोगों...