भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को मनीला में आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) के मौके पर पापुआ न्यू गिनी और ब्रुनेई के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इस दौरान द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और प्रमुख क्षेत्रों में जुड़ाव बढ़ाने पर चर्चा हुई।
आपसी सहयोग को गहरा करने पर चर्चा
पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री जस्टिन डब्ल्यू. तकाचेंको के साथ अपनी मीटिंग के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश की विकास प्राथमिकता के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा को समर्थन करने के लिए भारत की तैयारी पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने फोरम फॉर भारत-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) के जरिए आपसी सहयोग को गहरा करने पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया
बैठक की जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “मनीला, फिलीपींस, आसियान में पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री जस्टिन डब्ल्यू. टकाचेंको से मिलकर खुशी हुई। फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन के जरिए द्विपक्षीय सहयोग के बारे में बात की। भारत पैसिफिक आइलैंड देशों के विकास और कैपेसिटी बिल्डिंग प्राथमिकता के लिए उनके साथ साझेदारी करने के लिए तैयार है, साथ ही उनकी समुद्री सुरक्षा को भी समर्थन करेगा।”
जयशंकर ने ब्रुनेई के विदेश मंत्री अब्दुल मतीन से भी मुलाकात की
विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रुनेई के विदेश मंत्री अब्दुल मतीन से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने नई तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर बात की और आसियान के जरिए जुड़ाव को और मजबूत करते हुए भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, “ब्रुनेई के विदेश मंत्री प्रिंस अब्दुल मतीन के साथ गर्मजोशी से मुलाकात हुई। उन्हें उनकी मौजूदा जिम्मेदारियां संभालने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि एआई, ड्रोन, डिजिटल समेत तेजी से बदलती तकनीक ने जुड़ाव के नए रास्ते खोले हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के हिसाब से द्विपक्षीय एजेंडा को आगे बढ़ाने और आसियान के तहत हमारे बहुपक्षीय जुड़ाव को और मजबूत करने पर भी सहमत हुए।”
व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य
इससे पहले, विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने मनीला में आयोजित 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र रूप से जारी रहना चाहिए।
जयशंकर ने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी जयशंकर ने कहा कि उन्होंने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया, जिसके पांचों प्रमुख स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा, “भारत आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने, साझा मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित करने और वास्तविक समय व टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करने का समर्थन करता है।”
भारत सीडीआरआई का समर्थन करता है
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) का समर्थन करता है। नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल, राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा, “हाल के समय में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, जमैका में आए चक्रवातों के साथ ही म्यांमार, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंपों के बाद पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग दिया है।”
विदेश मंत्री ने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के गंभीर परिणाम होने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाले स्रोतों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विदेश मंत्री ने बताया, “भारत, मलेशिया के साथ मिलकर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (एडीएमएम+) के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है।” (इनपुट-आईएएनएस)


