भारत की नजर 179 अरब डॉलर के खिलौना बाजार पर, निर्मला सीतारमण ने रखा 25% हिस्सेदारी का लक्ष्य

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भारतीय खिलौना उद्योग से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2032 तक 179 अरब डॉलर तक पहुंचने वाले वैश्विक खिलौना बाजार में 25% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार की संभावनाओं के साथ-साथ भारतीय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।

वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभाने का आह्वान

राष्ट्रीय राजधानी में टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का घरेलू खिलौना बाजार वर्ष 2034 तक करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन उद्योग को इससे कहीं बड़े वैश्विक बाजार को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक खिलौना कारोबार में भारत के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं और देश को अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने की जरूरत है।

गुणवत्ता मानकों से मजबूत हुआ खिलौना उद्योग

निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े गुणवत्ता मानकों और नियामकीय सुधारों ने भारतीय खिलौना उद्योग को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया है, ताकि देश में केवल सुरक्षित और प्रमाणित खिलौनों की बिक्री सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि आयातित खिलौनों में भी सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है, जिससे असुरक्षित उत्पादों को भारतीय बाजार तक पहुंचने से रोका जा सके।

राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना से मिलेगा बढ़ावा

वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक खिलौना निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस योजना के तहत विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और उच्च गुणवत्ता वाले, नवाचार आधारित, टिकाऊ तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े खिलौनों के निर्माण के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा।

खिलौना निर्यात में दर्ज हुई तेज वृद्धि

सरकार के अनुसार, भारत का खिलौना निर्यात वर्ष 2017-18 में 152.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 384.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह 151.9% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। सरकार ने कहा कि इस वृद्धि के पीछे मजबूत घरेलू मांग, सरकारी नीतियों का समर्थन, पारंपरिक शिल्प कौशल और भारतीय खिलौनों की वैश्विक स्वीकार्यता प्रमुख कारण हैं।

अमेरिका समेत कई देशों में बढ़ी मांग

एचएसएन 9503 श्रेणी के इलेक्ट्रॉनिक और गैर-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का निर्यात 77.35 मिलियन डॉलर से बढ़कर 200.89 मिलियन डॉलर हो गया है, जो करीब 160% की वृद्धि है। इस श्रेणी में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा, जहां निर्यात बढ़कर करीब 111.9 मिलियन डॉलर पहुंच गया। इसके अलावा ब्रिटेन, पोलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख बाजार रहे।

रोजगार और उद्यमिता का नया क्षेत्र बन रहा खिलौना उद्योग

सरकार ने कहा कि खिलौना उद्योग अब विनिर्माण, रोजगार और उद्यमिता के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहा है। यह क्षेत्र देशभर के कारीगरों, निर्माताओं, व्यापारियों और छोटे व्यवसायों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत केवल अधिक खिलौने बनाने की दिशा में नहीं बढ़ रहा, बल्कि ऐसा मजबूत ढांचा तैयार कर रहा है जिससे गुणवत्ता, नवाचार और भारतीय पहचान वाले खिलौनों को वैश्विक बाजार में स्थान मिल सके। (इनपुट: आईएएनएस)

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