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भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर: तुहिन कांता पांडे

मुंबई में आयोजित पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि इस तेज आर्थिक वृद्धि से देश में समृद्ध (Affluent) निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। उनके अनुसार, उच्च-नेटवर्थ निवेशक पारंपरिक निवेश विकल्पों से आगे बढ़कर पेशेवर रूप से प्रबंधित और अधिक परिष्कृत निवेश समाधान चाहते हैं, जो मानकीकृत उत्पादों से अलग हों।

PMS नियमों की समीक्षा की तैयारी

पांडेय ने बताया कि बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए SEBI LODR, सेटलमेंट और PMS नियमों की समीक्षा कर रहा है। यह समीक्षा उद्योग और निवेशकों से मिले फीडबैक के आधार पर तर्कसंगत (rationalization) ढांचे के लिए की जा रही है, ताकि नियामकीय ढांचा समकालीन और प्रभावी बना रहे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि PMS नियमों की समीक्षा 2020 के बाद पहचानी गई कुछ जरूरतों के आधार पर की जा रही है, हालांकि इसकी अंतिम रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। प्रस्तावित बदलावों पर सार्वजनिक सुझाव लेने के लिए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया जाएगा।

बाजार निगरानी में AI का उपयोग

बाजार की स्थिरता और तकनीक के उपयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि SEBI बाजार में गड़बड़ियों की “रियल-टाइम डिटेक्शन” के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि केवल प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई के बजाय त्वरित निगरानी संभव हो सके।

कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर SEBI–RBI की पहल

उन्होंने बताया कि SEBI और RBI संयुक्त रूप से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स और उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा। यह कदम डेट मार्केट को गहराई देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, क्योंकि यह उत्पाद दोनों नियामकों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

ब्रोकरों की चिंताओं पर विचार

उद्योग से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि SEBI गिरवी (Collateral) और बैंक गारंटी से संबंधित RBI दिशा-निर्देशों पर ब्रोकरों के प्रतिनिधित्व की समीक्षा करेगा, ताकि प्रोपाइटरी ट्रेडिंग को सुगम बनाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

पांडेय के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति निवेश परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव लाने जा रही है, जिसके लिए नियामकीय ढांचे को भी समयानुकूल बनाना आवश्यक है।

(इनपुट- ANI)