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भारत का डेयरी उद्योग: पोषण और आजीविका का मजबूत सहारा

भारत का डेयरी उद्योग न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि करोड़ों परिवारों के लिए आय और पोषण का भी सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। पंजाब के रूपनगर जिले की गुरविंदर कौर की कहानी इसका उदाहरण है। उन्होंने एक गाय से शुरुआत कर मेहनत और आधुनिक तकनीक के सहारे आज रोज़ 90 लीटर दूध का उत्पादन करना शुरू कर दिया है।

भारत कई सालों से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। 2023-24 में देश में 239.30 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ, जो 2014-15 के मुकाबले 63% से अधिक की वृद्धि है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता भी अब 471 ग्राम प्रतिदिन तक पहुँच गई है, जो वैश्विक औसत 322 ग्राम से कहीं अधिक है।

ग्रामीण भारत में डेयरी से सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को हुआ है। लगभग 70% कामकाज महिलाएं संभाल रही हैं और 48,000 से अधिक महिला सहकारी समितियाँ गाँव स्तर पर सक्रिय हैं। यही कारण है कि डेयरी को समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम माना जा रहा है।

सरकार भी डेयरी उद्योग को मज़बूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम और श्वेत क्रांति 2.0 जैसी योजनाएँ दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।

भारत का डेयरी उद्योग आज दुनिया के सामने यह उदाहरण पेश कर रहा है कि कैसे विज्ञान, सहकारिता और महिला शक्ति मिलकर ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख सकते हैं।

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