शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) पर विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा कि ये दोनों पहल भारत में आजीवन सीखने (Lifelong Learning) और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनका उद्देश्य छात्रों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना, क्रेडिट ट्रांसफर को आसान बनाना और शिक्षा को अधिक लचीला एवं पारदर्शी बनाना है।
26.30 करोड़ APAAR आईडी जारी
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 तक देशभर में 26.30 करोड़ सत्यापित APAAR आईडी बनाई जा चुकी हैं। APAAR एक 12 अंकों की यूनिक स्टूडेंट आईडी है, जिसे ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल के तहत शुरू किया गया है।
यह आईडी डिजीलॉकर से जुड़ी होती है और छात्र के स्कूल, उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है। दूरदराज के क्षेत्रों में भी इसकी सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से APAAR आईडी बनाई जा रही है।
क्या है अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC)?
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) शिक्षा मंत्रालय की एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) संचालित करता है।
यह प्लेटफॉर्म छात्रों द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट को सुरक्षित रखने, प्रबंधित करने, स्थानांतरित करने और भविष्य में उपयोग करने की सुविधा देता है।
यदि कोई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, तो उसके अर्जित क्रेडिट सुरक्षित रहते हैं। बाद में पढ़ाई दोबारा शुरू करने पर वह इन्हीं क्रेडिट का उपयोग कर अपनी शिक्षा पूरी कर सकता है।
2,963 संस्थान ABC से जुड़े
सरकार के अनुसार, देशभर के 2,963 उच्च शिक्षण संस्थान ABC प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
अब तक:
- 26.29 करोड़ APAAR आईडी बनाई जा चुकी हैं।
- 110.65 करोड़ शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड किए जा चुके हैं।
UGC ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 30 जून 2026 तक ABC पोर्टल पर छात्रों के क्रेडिट डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए थे।
छात्रों को मिल रहे कई लाभ
ABC और APAAR के माध्यम से छात्रों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिल रही हैं:
- विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच आसानी से क्रेडिट ट्रांसफर।
- मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (MEE) व्यवस्था का लाभ।
- कहीं से भी डिजिटल डिग्री और प्रमाणपत्र तक पहुंच।
- पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के लिए दोबारा शिक्षा शुरू करने का अवसर।
- औपचारिक, अनौपचारिक और अनुभव आधारित शिक्षा को मान्यता।
सरकार के अनुसार, 153 विश्वविद्यालयों में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था लागू हो चुकी है, जिससे 31,156 स्नातक और 5,583 स्नातकोत्तर छात्र लाभान्वित हुए हैं।
SWAYAM और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क से जुड़ा
ABC को राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) और SWAYAM ऑनलाइन शिक्षा मंच से भी जोड़ा गया है।
- 388 विश्वविद्यालयों ने SWAYAM के तहत ऑनलाइन अर्जित 40 प्रतिशत तक क्रेडिट स्वीकार करने का प्रावधान अपनाया है।
- 170 विश्वविद्यालय राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) लागू कर चुके हैं।
डेटा सुरक्षा पर विशेष जोर
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि ABC और APAAR में छात्रों के डेटा की सुरक्षा के लिए आधुनिक एन्क्रिप्शन और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। सभी रिकॉर्ड आधार और डिजीलॉकर आधारित प्रमाणीकरण के जरिए सुरक्षित रखे जाते हैं।
भारत प्रमाण चेन से और मजबूत होगी व्यवस्था
सरकार ने बताया कि भविष्य में भारत प्रमाण चेन (Bharat Praman Chain) के माध्यम से डिजिटल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को और अधिक सुरक्षित एवं छेड़छाड़-रोधी बनाया जाएगा। यह डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) द्वारा विकसित भारत का स्वदेशी ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म है, जो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप कार्य करेगा।
सरकार का मानना है कि ABC और APAAR मिलकर भारत में एक विश्वसनीय, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख डिजिटल शिक्षा इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
-(इनपुटःपीआईबी)


