भारत की एकता संतों और ऋषियों की देन, राजनीतिक संस्थाओं की नहीं : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में ‘अगथियार – द यूनिफायर’ पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की एकता कोई आधुनिक या समकालीन अवधारणा नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों से संतों, ऋषियों और प्रबुद्ध विचारकों द्वारा पोषित एक प्राचीन सभ्यतागत वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि महर्षि अगस्त्य का जीवन और विरासत इस शाश्वत सत्य की सशक्त अभिव्यक्ति है।

संतों और ऋषियों ने गढ़ी भारत की एकता

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय एकता की चर्चा के दौरान अक्सर राजाओं और राजनीतिक संस्थाओं का उल्लेख किया जाता है, लेकिन भारत की वास्तविक एकता के निर्माता इसके संत और ऋषि रहे हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि अगस्त्य भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के सबसे महान प्रतीकों में से एक हैं, जिन्हें उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं में समान श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।

उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सेतु थे अगस्त्य

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि तमिलनाडु की पोथिगई पहाड़ियां और कावेरी नदी आज भी अगस्त्य की स्मृतियों को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने तमिल व्याकरण और तमिल संगम परंपरा के विकास में अगस्त्य के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

भारतीय भाषाएं प्रतिस्पर्धी नहीं, बहन भाषाएं हैं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अगस्त्य की विरासत यह संदेश देती है कि भारत की भाषाएं एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि बहन भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से आपसी सम्मान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारतीय भाषाओं ने एक-दूसरे को समृद्ध किया है।

तमिल भाषा के संवर्धन में योगदान देने वालों को मिले सम्मान

उन्होंने चिंता जताई कि तमिल भाषा के विकास और संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अनेक विद्वानों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया है। इस संदर्भ में उन्होंने तमिल विद्वान स्वामीनाथ अय्यर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सेवाओं को व्यापक स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथ अय्यर ने तमिल साहित्य की अमूल्य धरोहरों को नष्ट होने और भुला दिए जाने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भाषाई विभाजन को बढ़ावा देने वालों से सावधान रहने की जरूरत

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रत्येक भाषा की अपनी विशिष्ट ताकत और पहचान है, लेकिन कुछ लोग भाषाई विभाजन को बढ़ावा देकर अनावश्यक विवाद और विभाजनकारी प्रवृत्तियों को जन्म देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी शक्ति भारत में विभाजन पैदा नहीं कर सकती और समाज में ऐसी चर्चाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जो युवाओं को भारत की संस्कृति और सभ्यतागत विरासत से जोड़ें।

सांस्कृतिक एकता का प्रमाण हैं अगथीश्वरार मंदिर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिलनाडु में 100 से अधिक मंदिर महर्षि अगस्त्य को समर्पित हैं, जिन्हें अगथीश्वरार मंदिर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि काशी और तमिलनाडु दोनों स्थानों पर एक ही नाम से मंदिरों का होना भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रमाण है।

ब्रिटिश शासन से पहले भी एकजुट था भारत

सी.पी. राधाकृष्णन उस धारणा को खारिज किया कि ब्रिटिश शासन के बिना भारत एकजुट नहीं रह सकता था। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता ने सदियों से लोगों को क्षेत्रीय और पीढ़ीगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक सूत्र में बांधे रखा है।

पुस्तक को बताया सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण दस्तावेज

उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के लेखकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शोध के माध्यम से भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में महर्षि अगस्त्य से जुड़ी परंपराओं, कथाओं और संदर्भों का व्यापक दस्तावेजीकरण किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक महर्षि अगस्त्य की महानता और भारत की सांस्कृतिक एकता के संदेश को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कलाईमगल पत्रिका के योगदान की सराहना

उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के प्रकाशन के लिए कलाईमगल पत्रिका की सराहना करते हुए कहा कि यह पत्रिका 95 वर्षों से अधिक समय से तमिल साहित्य, संस्कृति और विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि अनेक तमिल विद्वानों, इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और राष्ट्रीय नेताओं ने अपने लेखन से इस पत्रिका की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को समृद्ध किया है।

कई विशिष्ट हस्तियां रहीं मौजूद

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर, कलाईमगल पत्रिका के संपादक कीलंबुर शंकर सुब्रमणियन, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार मालन, पुस्तक के लेखक ओ. शमा भट और डॉ. एम.एन. सुधा, तथा पुस्तक की तमिल अनुवादक प्रोफेसर कल्याणी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। (इनपुट-आईएएनएस)