भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) ने विकसित उत्तर प्रदेश-विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (डीएसएमएनआरयू), लखनऊ और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीएसआईआर-सीआईएमएपी) के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर और नवीनीकरण किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था आईपीसी का कहना है कि इन साझेदारियों से स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी।
औषधीय पौधों और हर्बल दवाओं पर सहयोग जारी
सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत समझौता ज्ञापन के तहत औषधीय पौधों के अनुसंधान, उनके मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन के क्षेत्र में दोनों संस्थान मिलकर काम करते रहेंगे। इस सहयोग का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना और गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पादों के विकास को मजबूत करना है।
दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों की गुणवत्ता पर होगा शोध
डीएसएमएनआरयू के साथ हुए नए समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दिव्यांगजनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए प्रोटोकॉल विकसित करना है। इसके साथ ही सांकेतिक भाषा आधारित फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल भी विकसित किए जाएंगे, ताकि दिव्यांगजनों में दवा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिल सके।
स्वास्थ्य गुणवत्ता में उत्कृष्टता केंद्र बनने की दिशा
समझौता समारोह में डीएसएमएनआरयू के कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन और सीएसआईआर-सीआईएमएपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. वी. कलैसेल्वन ने कहा कि ये साझेदारियां वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और संस्थागत सहयोग को मजबूत करेंगी, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवा और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
‘विकसित यूपी-विकसित भारत’ को मिलेगा बल
डॉ. कलैसेल्वन ने कहा कि सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने वाली ऐसी पहलें ‘विकसित यूपी-विकसित भारत’ के साझा लक्ष्य को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्ता, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना आईपीसी की प्रमुख प्रतिबद्धता है। (इनपुट: पीआईबी)


