जल जीवन मिशन 2.0: जल स्रोतों के संरक्षण और पंचायतों की भागीदारी पर जोर

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने बुधवार को ‘सुजल ग्राम संवाद’ का 12वां संस्करण आयोजित किया। इसमें ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के संचालन और रखरखाव, जल स्रोतों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य जल जीवन मिशन 2.0 के तहत गांवों में पेयजल सेवाओं को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने की। इसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बहुभाषी संवाद के माध्यम से देश के पांच ग्राम पंचायत मुख्यालय वाले गांवों के प्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदायों से बातचीत की गई।

मीणा ने कहा कि 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतों को स्थानीय पेयजल और स्वच्छता सेवाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने पंचायतों को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने के लिए सक्षम बनाने पर जोर दिया। साथ ही, जल सेवा आकलन और स्वच्छ सेवा आकलन के जरिये नियमित मूल्यांकन करने, सेवाओं में कमियों की पहचान करने और सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने पंचायतों से 16वें वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी उपयोग करने और जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए उपयोगकर्ता शुल्क वसूली की व्यवस्था को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में संवाद आयोजित करने को भी महत्वपूर्ण बताया, ताकि ग्रामीण समुदाय अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की घलियान ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि जल जीवन मिशन लागू होने से पहले ग्रामीण पेयजल के लिए मुख्य रूप से बोरवेल और पानी के टैंकरों पर निर्भर थे। अब कठिन पहाड़ी भूभाग और ऊंचाई में अंतर के बावजूद पंचायत के सभी छह गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति हो रही है। समुदाय के अनुसार, जल गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) की मदद से महीने में दो बार पानी की जांच करती हैं। इसमें पीएच, गंदलापन, टीडीएस, कठोरता और क्लोरीन जैसे मानकों की जांच शामिल है।

कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने राज्य में सभी घरों तक पेयजल पहुंचाने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए जल गुणवत्ता की निगरानी और जल सेवा आकलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। इस पर मीणा ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से क्षमता निर्माण और संस्थागत मजबूती के माध्यम से ग्राम पंचायतों को संचालन एवं रखरखाव की अधिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की इतोरे ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने हिंदी और हो भाषा में बताया कि पहले महिलाओं और लड़कियों को हैंडपंप, कुओं और नदियों-नालों जैसे पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने में काफी समय लगाना पड़ता था। अब घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध होने से उनकी परेशानी कम हुई है। पंचायत में प्रति परिवार 62 रुपये मासिक उपयोगकर्ता शुल्क लिया जा रहा है। जल सहिया और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) के सदस्य उन परिवारों को भी शुल्क जमा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिन्होंने अभी तक योगदान नहीं दिया है।

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को नल जल से जोड़ा गया है तथा पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है। आकांक्षी जिले में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के संसाधनों का उपयोग पेयजल सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। जल सहियाओं के लिए प्रोत्साहन, सखी संवाद कार्यक्रम और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसी पहलें भी शुरू की गई हैं।

दादरा और नगर हवेली के अथाल ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि पाइप से पेयजल आपूर्ति बेहतर होने से लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। समुदाय के अनुसार, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ने से दस्त संबंधी बीमारियों में कमी आई है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने का प्रशिक्षण दिया गया है और विद्यार्थियों ने स्कूलों में पेयजल सुविधाओं में सुधार की जानकारी साझा की।

दादरा और नगर हवेली के जिला पंचायत अधिकारी पंकज सिंह परमार ने बताया कि ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी के लिए एससीएडीए (SCADA) आधारित प्रणालियों सहित डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्रशासित प्रदेश में सभी घरों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक संस्थानों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और इसे ‘हर घर जल’ घोषित किया गया है।

मिजोरम के खावजॉल जिले की सियालहॉक ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने मिजो भाषा में बताया कि जल जीवन मिशन से पहले ग्रामीण अपनी दैनिक जरूरतों के लिए झरनों और जलधाराओं पर निर्भर थे। अब घरों में नल कनेक्शन मिलने से सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता में काफी सुधार हुआ है। गांव में प्रत्येक परिवार से 150 रुपये मासिक उपयोगकर्ता शुल्क लिया जाता है। समुदाय की सक्रिय भागीदारी के कारण शुल्क का नियमित संग्रह होता है और इसका इस्तेमाल जल आपूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव में किया जाता है।

नागालैंड के जुन्हेबोटो जिले के नाथा न्यू विलेज ने जल जीवन मिशन के तहत गुरुत्वाकर्षण आधारित जल आपूर्ति योजना के जरिये सभी घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने की जानकारी दी। हालांकि, गांव के प्रतिनिधियों ने पंपिंग प्रणालियों, बिजली आपूर्ति में रुकावट और दूरदराज के क्षेत्रों में उपकरणों के रखरखाव से जुड़ी चुनौतियां भी बताईं। समुदाय ने नियमित जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।

जुन्हेबोटो के जिला कलेक्टर बी. हेनोक बुचेम ने बताया कि गांव की जल एवं स्वच्छता समिति सक्रिय है और समुदाय स्वयं कई पहल कर रहा है। जल स्रोतों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए जलग्रहण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी किया गया है। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक सोआन ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत निर्मित बुनियादी ढांचे के साथ जल स्रोतों का संरक्षण भी जरूरी है, ताकि अगले 25 से 30 वर्षों तक विश्वसनीय पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

समापन संबोधन में सोआन ने कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 की दीर्घकालिक सफलता के लिए ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के माध्यम से वीबी-जी राम जी, वित्त आयोग के अनुदान, राज्य सरकार की योजनाओं और अन्य उपलब्ध संसाधनों का समन्वित उपयोग करने पर जोर दिया। इन संसाधनों से जल स्रोतों को मजबूत करने, पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के रखरखाव और स्वच्छता सेवाओं में सुधार किया जा सकता है।

उन्होंने राज्यों, जिलों और ग्राम पंचायतों से जल स्रोतों के संरक्षण, उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह की संस्थागत व्यवस्था, सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ रखरखाव को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा तभी लंबे समय तक लाभ दे सकता है, जब जल स्रोतों का संरक्षण और प्रबंधन भी टिकाऊ तरीके से किया जाए।

-(इनपुटः पीआईबी)

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