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संस्कृति मंत्रालय करेगा ‘ज्ञान भारतम्’ की शुरुआत; पांडुलिपि धरोहर पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री

संस्कृति मंत्रालय ‘ज्ञान भारतम्’ नामक एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहल की शुरुआत करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत की पांडुलिपि धरोहर का संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार करना है। इस अवसर पर 11 से 13 सितंबर 2025 तक विज्ञान भवन, नई दिल्ली में पहला ज्ञान भारतम् अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का विषय है— “पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत की पुनः प्राप्ति”।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से 1,100 से अधिक विद्वान, विशेषज्ञ, संस्थान और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह सम्मेलन संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक स्तर पर भारत की पांडुलिपियों को साझा करने की दिशा में एक सहयोगी मंच उपलब्ध कराएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने जानकारी दी कि ‘ज्ञान भारतम्’ प्रधानमंत्री द्वारा घोषित एक महत्त्वपूर्ण योजना है, जिसके अंतर्गत देशभर में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और कैटलॉगिंग की जाएगी। इसके साथ ही डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जाएगी ताकि विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, धर्म और अध्यात्म से जुड़ी पांडुलिपियों में निहित ज्ञान का व्यापक उपयोग और प्रसार किया जा सके।

उन्होंने बताया कि यह मिशन पुस्तकालयों, धार्मिक संस्थानों और निजी संरक्षकों के साथ साझेदारी में लागू किया जाएगा, जिससे पांडुलिपियों को सुरक्षित और सुलभ बनाया जा सके। सम्मेलन में आठ कार्य समूह गठित किए गए हैं, जो लिपि-पढ़ाई, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, संरक्षण और कानूनी ढांचे जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

अग्रवाल ने कहा कि इस पहल में तकनीक का बड़ा योगदान होगा। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान-सेतु एआई नवाचार चुनौती’ में अब तक 40 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं और चयनित नवाचार सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री 12 सितंबर को सम्मेलन में भाग लेंगे, विभिन्न कार्य समूहों की प्रस्तुतियां सुनेंगे और उसके बाद सभा को संबोधित करेंगे। वहीं, 13 सितंबर को समापन सत्र की अध्यक्षता भारत के गृह मंत्री करेंगे।

संस्कृति मंत्रालय की यह पहल न केवल भारत की सभ्यतागत जड़ों को सम्मान देने का प्रयास है बल्कि विकसित भारत 2047 के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘ज्ञान भारतम्’ संरक्षण, डिजिटलीकरण, शोध, अनुवाद, प्रकाशन और वैश्विक पहुँच के माध्यम से भारत की प्राचीन पांडुलिपि धरोहर को पुनर्जीवित कर दुनिया के सामने भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को प्रस्तुत करेगा।

(पीआईबी)

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