साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने में ‘म्यूल अकाउंट’ अहम जरिया बनते जा रहे हैं। इन खातों के जरिए साइबर ठगी से हासिल रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर उसके स्रोत और वास्तविक लाभार्थी को छिपाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में कई बार खाताधारक को यह जानकारी भी नहीं होती कि उसके खाते में पहुंची रकम किसी अपराध से जुड़ी है, लेकिन बाद में उसका बैंक खाता फ्रीज होने के साथ उसे जांच का सामना करना पड़ सकता है।
ज्वेलरी खरीद के नाम पर ठगी का मामला
एक मामले में कुछ लोगों ने एक ज्वेलर से करीब 40 लाख रुपए की ज्वेलरी खरीदी। आरोपियों ने 2 लाख रुपए नकद दिए और बाकी 38 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए देने का भरोसा दिलाया। ज्वेलर के बैंक खाते में रकम पहुंचने के बाद बैंक से ट्रांजेक्शन की पुष्टि भी हो गई। इसके बाद आरोपियों ने ज्वेलरी अपने कब्जे में ले ली। बाद में पुलिस ने ज्वेलर को बताया कि उसके खाते में आई रकम साइबर ठगी से जुड़ी थी। इसके बाद उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया। यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध की रकम अगर किसी वैध कारोबारी या आम व्यक्ति के खाते तक पहुंच जाए तो जानकारी के अभाव में भी खाताधारक जांच के दायरे में आ सकता है।
संदिग्ध लेनदेन की पहचान में एआई का सहारा
म्यूल अकाउंट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकारी एजेंसियां, बैंक और वित्तीय संस्थान संदिग्ध लेनदेन की पहचान के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को आगे भेजने के लिए किया जा सकता है। लेनदेन के असामान्य पैटर्न, रकम के अचानक बढ़ने और कई खातों के बीच लगातार ट्रांसफर जैसी गतिविधियों का विश्लेषण कर संदिग्ध नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
टेलीकॉम विभाग का FRI सिस्टम
दूरसंचार विभाग ने Financial Fraud Risk Indicator (FRI) व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में रिपोर्ट किए गए मोबाइल नंबरों के जोखिम का आकलन किया जाता है। जोखिम के आधार पर नंबरों को मध्यम, उच्च या बहुत अधिक जोखिम वाली श्रेणियों में रखा जा सकता है। इससे जुड़ी जानकारी बैंकों, पेमेंट प्लेटफॉर्म और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझा की जा सकती है। इसका मकसद संदिग्ध या हाई-रिस्क नंबर से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर समय रहते अलर्ट जारी करना और संभावित धोखाधड़ी को रोकने के लिए कार्रवाई करना है।
‘MuleHunter’ से खातों के पैटर्न की निगरानी
RBI Innovation Hub ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए ‘MuleHunter’ नाम का एआई आधारित टूल विकसित किया है। यह बैंकिंग डेटा में ऐसे पैटर्न की पहचान करने में मदद करता है, जो किसी खाते के म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल होने का संकेत दे सकते हैं। इसमें अचानक लेनदेन की मात्रा बढ़ना, एक खाते से कई अलग-अलग खातों में बार-बार रकम ट्रांसफर होना, लंबे समय से निष्क्रिय खाते में अचानक असामान्य गतिविधि शुरू होना और संदिग्ध लॉगिन लोकेशन या आईपी एड्रेस जैसे संकेतों का विश्लेषण किया जा सकता है।
KYC प्रक्रिया में खामियों पर भी नजर
जांच एजेंसियां म्यूल अकाउंट के नेटवर्क की पड़ताल के साथ बैंक खाता खोलने और KYC प्रक्रिया में संभावित कमियों पर भी नजर रख रही हैं। कई मामलों में बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते किसी खास बैंक शाखा या बिचौलियों से जुड़े पाए जा सकते हैं। इससे पहचान और सत्यापन प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
सख्त KYC से फर्जी खातों पर लग सकती है रोक
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक खाता खोलते समय मजबूत KYC, आमने-सामने सत्यापन और वीडियो KYC जैसे उपाय फर्जी या संदिग्ध खातों के खुलने की संभावना कम कर सकते हैं। खाते के वास्तविक उपयोगकर्ता की पहचान और उसके बैंकिंग व्यवहार की पर्याप्त पुष्टि होने पर साइबर अपराधियों के लिए म्यूल अकाउंट का नेटवर्क तैयार करना मुश्किल हो सकता है।
ग्राहकों को भी सतर्क रहने की जरूरत
अधिकारियों ने बैंक ग्राहकों से अपने खातों की नियमित निगरानी करने और किसी अनजान या संदिग्ध लेनदेन की तत्काल सूचना देने की अपील की है। लोगों को अनजान व्यक्तियों के साथ आधार संबंधी जानकारी, बायोमेट्रिक डाटा, चेकबुक, एटीएम या डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। खाते में किसी अनजान स्रोत से रकम आने पर उसे आगे ट्रांसफर करने या निकालने से पहले बैंक से संपर्क करना भी जरूरी है। साइबर अपराध से जुड़ी रकम का लेनदेन पाए जाने पर खाताधारक को भी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
1930 पर तुरंत करें शिकायत
साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। इसके अलावा National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से संदिग्ध लेनदेन को रोकने और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
एआई और मजबूत KYC से नेटवर्क तोड़ने की कोशिश
म्यूल अकाउंट साइबर अपराध के नेटवर्क में ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने वाली अहम कड़ी बन चुके हैं। ऐसे में मजबूत KYC व्यवस्था, वित्तीय खुफिया जानकारी और एआई आधारित निगरानी को एक साथ इस्तेमाल करना साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेनदेन के असामान्य पैटर्न की जल्द पहचान होने पर बैंक और जांच एजेंसियां संदिग्ध रकम की आवाजाही रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई कर सकती हैं।


