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नडेला को तकनीकी सम्मान, वहीं माइक्रोसॉफ्ट पर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के भारतीय मूल के सीईओ सत्या नडेला को अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व में योगदान के लिए सम्मानित किया, वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनी पर कुशल विदेशी कर्मचारियों के वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड से जुड़ी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की।

इस विरोधाभास को लेकर वेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि जब प्रशासन माइक्रोसॉफ्ट पर आव्रजन कार्यक्रमों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, तो ट्रंप ने उसी कंपनी के प्रमुख को देश के सर्वोच्च तकनीकी सम्मानों में से एक क्यों दिया।वेंस ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट एक बड़ी अमेरिकी कंपनी है और प्रशासन के उसके साथ अच्छे संबंध हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी का समर्थन जारी रखेगी, लेकिन जब तक वह अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाती, तब तक उसे स्थायी निवास के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसके कुछ घंटे बाद ट्रंप ने ‘न्यू गोल्डन एज समिट’ में नडेला की उपलब्धियों की सराहना की। इस कार्यक्रम में छह प्रमुख प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को राष्ट्रीय विज्ञान पदक या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पदक से सम्मानित किया गया।

ट्रंप ने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय से नडेला माइक्रोसॉफ्ट के बदलाव में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कंपनी को नई दिशा दी और दुनिया भर के कारोबारियों, विद्यार्थियों तथा उपभोक्ताओं को उन्नत सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने में योगदान दिया है।

ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड कंप्यूटिंग कारोबार में बदलाव और सुपरइंटेलिजेंस के क्षेत्र में कंपनी को शुरुआती अग्रणी कंपनियों में शामिल करने के लिए भी नडेला की सराहना की। उन्होंने नडेला को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पदक प्रदान करते हुए इसे उनका पूरी तरह से योग्य सम्मान बताया।

हैदराबाद में जन्मे नडेला ने वर्ष 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ का पद संभाला था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि वह इस सम्मान से विनम्र महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी नवाचार के क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के साथ सम्मानित होने पर खुशी जताई और प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने तथा अमेरिकी समृद्धि में योगदान देने की बात कही।

हालांकि, नडेला का सम्मान ऐसे समय में आया है, जब प्रशासन ने रोजगार आधारित आव्रजन कार्यक्रमों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की है।
वेंस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि कंपनी को H-1B वीजा के तहत 6,300 मंजूरियां और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड मिले। उन्होंने दावा किया कि कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करके अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, उपलब्ध विवरण में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया, जिससे साबित हो कि माइक्रोसॉफ्ट से निकाले गए कर्मचारियों की जगह सीधे H-1B वीजा धारकों को नियुक्त किया गया था।

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने बताया कि संघीय जांच जारी रहने के कारण श्रम विभाग माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से निलंबित कर रहा है। उन्होंने छह बड़ी आईटी सेवा कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की घोषणा की।

सोंडरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के नए आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

इस फैसले का भारत के प्रौद्योगिकी उद्योग पर खास असर पड़ सकता है, क्योंकि सूची में शामिल कई कंपनियों का भारत में बड़ा कारोबार है और वे अमेरिका में बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवरों को रोजगार देती हैं।

PERM कार्यक्रम रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। घोषित प्रतिबंधों से संबंधित कंपनियों के नए और लंबित श्रम प्रमाणन आवेदन प्रभावित होंगे। हालांकि, इससे अपने आप पहले से जारी H-1B वीजा रद्द नहीं होते और न ही कर्मचारियों को पहले से मिल चुकी स्थायी निवास की अनुमति समाप्त होती है। इसके बावजूद, अमेरिका में लंबे समय तक काम करने और स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे भारतीय पेशेवरों के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है।

वेंस ने कहा कि प्रशासन चाहता है कि कंपनियां अमेरिका में निवेश करें और यहां सफल हों, खासकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने असाधारण विदेशी प्रतिभाओं और कम वेतन पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कामगारों को नियुक्त करने के बीच अंतर भी बताया। वेंस ने एलन मस्क और एएमडी की सीईओ लिसा सु को ऐसी प्रतिभाओं के उदाहरण के रूप में पेश किया, जिनका अमेरिका में स्वागत किया जाना चाहिए। इन दोनों को भी उसी दिन ट्रंप ने सम्मानित किया।
एक पत्रकार ने वेंस से पूछा कि सरकार भविष्य के एलन मस्क जैसे प्रतिभाशाली लोगों की पहचान कैसे करेगी, क्योंकि सफल उद्यमी हमेशा पहले से स्थापित उपलब्धियों के साथ अमेरिका नहीं आते।

वेंस ने कहा कि प्रशासन यह देखेगा कि आवेदक के पास ऐसे कौशल हैं या नहीं, जिनकी अमेरिका में कमी है और क्या उसमें असाधारण क्षमता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका वास्तव में विशिष्ट और उच्चस्तरीय कौशल रखने वाले लोगों का स्वागत करना चाहता है।

हालांकि, इस नीति को लागू करना आसान नहीं होगा। बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन भविष्य के नवाचारों में योगदान देने वाले कई विद्यार्थी, युवा इंजीनियर और शोधकर्ता अभी अपने करियर के शुरुआती चरण में होते हैं। ऐसे में उनकी असाधारण प्रतिभा का पहले से आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यह कार्रवाई केवल प्रौद्योगिकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन ने हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, एमआईटी और कैलटेक समेत नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों में J-1 वीजा के इस्तेमाल की जांच की घोषणा की। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ संस्थान विदेशी शोधकर्ताओं का इस्तेमाल ऐसे तरीके से कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
दूसरी ओर, समिट में ट्रंप ने वर्ष 2028 तक वैज्ञानिक खोजों में मदद के लिए क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने का लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने ‘जेनेसिस मिशन’ और व्हाइट हाउस के सुपरइंटेलिजेंस समझौते का भी उल्लेख किया। इन पहलों के लिए उन्नत शोध, विशेष तकनीकी कौशल और निरंतर वैज्ञानिक नवाचार की जरूरत होगी।

प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य अमेरिकी रोजगार की रक्षा करना और साथ ही असाधारण प्रतिभाओं को देश में आकर्षित करना है। लेकिन इन दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए अहम चुनौती होगी।

नडेला को मिला सम्मान और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ घोषित कार्रवाई प्रशासन की नीति के दो पहलुओं को दिखाते हैं। एक ओर अमेरिका तकनीकी उपलब्धियों और नवाचार को बढ़ावा देना चाहता है, वहीं दूसरी ओर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सख्ती कर रहा है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को कुशल पेशेवर उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। H-1B कार्यक्रम के तहत भारतीय नागरिक सबसे बड़े लाभार्थी समूह रहे हैं। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाली नौकरियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जबकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया उनके लिए स्थायी निवास का संभावित रास्ता खोलती है।
हैदराबाद से माइक्रोसॉफ्ट के नेतृत्व तक नडेला का सफर इस व्यवस्था से जुड़ी सबसे प्रमुख सफल कहानियों में से एक है। लेकिन जिस दिन उनकी उपलब्धियों को सम्मानित किया गया, उसी दिन माइक्रोसॉफ्ट और कई बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों की घोषणा भी हुई।

-(इनपुटः आईएएनएस)

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