ब्रेन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, विटामिन B12 आधारित थेरेपी पर शोध

वैज्ञानिकों ने ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) जैसे बेहद आक्रामक और जानलेवा ब्रेन कैंसर के इलाज में विटामिन B12 आधारित नई थेरेपी को लेकर उत्साहजनक परिणाम सामने आने का दावा किया है। शोध के अनुसार, नाइट्रोसिलकोबालामिन (Nitrosylcobalamin या NO-Cbl) नामक विटामिन B12 का संशोधित रूप मस्तिष्क की सुरक्षा परत ब्लड-ब्रेन बैरियर (BBB) को पार कर सीधे ट्यूमर तक पहुंब्रेन कैंसरचने में सक्षम पाया गया।

यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका Oncoscience में प्रकाशित हुआ है। शोध का नेतृत्व जोसेफ ए. बाउर ने किया, जो Nitric Oxide Services LLC और क्लीवलैंड क्लिनिक फाउंडेशन टॉसिग कैंसर सेंटर से जुड़े हैं।

ग्लियोब्लास्टोमा का इलाज क्यों है चुनौतीपूर्ण

ग्लियोब्लास्टोमा मस्तिष्क के सबसे घातक कैंसरों में से एक माना जाता है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के बावजूद अधिकांश मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि 15 महीने से भी कम रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी बड़ी वजह ब्लड-ब्रेन बैरियर है, जो अधिकांश दवाओं को मस्तिष्क के ट्यूमर तक पहुंचने से रोक देता है।

विटामिन B12 आधारित थेरेपी पर कैसे हुआ परीक्षण

शोधकर्ताओं ने NO-Cbl का परीक्षण कई तरीकों से किया। इसमें कैंसर कोशिकाओं पर प्रयोग, ग्लियोब्लास्टोमा वाले चूहों में दवा के प्रभाव का अध्ययन तथा इसे मौजूदा उपचारों के साथ मिलाकर जांचना शामिल था।

परिणामों में पाया गया कि यह यौगिक कई प्रकार के कैंसर के खिलाफ सक्रिय रहा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े ट्यूमर पर भी प्रभावी साबित हुआ।

ब्लड-ब्रेन बैरियर पार कर सीधे ट्यूमर तक पहुंची दवा

पशु परीक्षणों में वैज्ञानिकों ने पाया कि NO-Cbl सफलतापूर्वक ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर मस्तिष्क के ट्यूमर ऊतकों में जमा हो गई।

शोध के दौरान यह भी देखा गया कि दवा से बनने वाला नाइट्रेट ट्यूमर में कम से कम 24 घंटे तक बना रहा, जबकि सामान्य ऊतकों में इसका स्तर तेजी से कम हो गया। इससे संकेत मिलता है कि यह दवा सीधे ट्यूमर पर अधिक समय तक असर डाल सकती है।

मौजूदा उपचारों के साथ मिला बेहतर परिणाम

शोधकर्ताओं ने NO-Cbl को TRAIL और टेमोजोलोमाइड (Temozolomide) जैसी मौजूदा ग्लियोब्लास्टोमा दवाओं के साथ भी परखा।

प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में पाया गया कि इन दवाओं के साथ NO-Cbl देने पर कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को अकेले उपचार की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से रोका जा सका। विश्लेषण में दोनों उपचारों के बीच सिनर्जिस्टिक (परस्पर प्रभाव बढ़ाने वाला) असर भी देखा गया।

दवा प्रतिरोध की समस्या से भी मिल सकती है राहत

शोधकर्ताओं का कहना है कि NO-Cbl उन जैविक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकता है जिनकी वजह से ग्लियोब्लास्टोमा की कोशिकाएं इलाज के प्रति प्रतिरोधी बन जाती हैं।

अध्ययन के अनुसार यह यौगिक कैंसर कोशिकाओं की मृत्यु (Apoptosis) को बढ़ावा देने, NF-kB सिग्नलिंग को दबाने और TRAIL रिसेप्टर की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे इलाज के प्रति प्रतिरोधी ट्यूमर भी उपचार के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

अभी शुरुआती चरण में है शोध

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक (पायलट) अध्ययन है और इसे अभी मरीजों के नियमित इलाज के रूप में नहीं अपनाया जा सकता।

अब आगे के शोध में इस थेरेपी की प्रभावशीलता, सुरक्षित खुराक, लंबे समय तक असर और अन्य प्रकार के मस्तिष्क ट्यूमर पर इसके परिणामों का अध्ययन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के परीक्षण सफल रहे, तो विटामिन B12 आधारित NO-Cbl थेरेपी भविष्य में ग्लियोब्लास्टोमा जैसे घातक ब्रेन कैंसर के इलाज के लिए एक नई और प्रभावी रणनीति साबित हो सकती है।

-(इनपुटःएएनआई)