पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग के अनुसार, मामलों की बहुत कम रिपोर्टिंग, संबंधित संस्थाओं के बीच खराब समन्वय और सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजाम इस समस्या से निपटने में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
समस्या को कैसे देखा जाए?
HRCP ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण को सिर्फ साइबर अपराध नहीं माना जाना चाहिए। इसे बच्चों के मौलिक अधिकारों, उनकी गरिमा और व्यक्तिगत सुरक्षा के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाना चाहिए। आयोग ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि बाल संरक्षण एजेंसियों, पुलिस, साइबर अपराध जांचकर्ताओं, अभियोजकों और अदालतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए। इससे जांच मजबूत होगी और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। प्रभावित बच्चों को कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में पाकिस्तान से जुड़े बच्चों के यौन शोषण से संबंधित संदिग्ध मामलों की संख्या 20 लाख से अधिक हो गई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की रिपोर्टों को दर्शाते हैं, न कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या को। सितंबर में नेशनल कमीशन ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड और यूनिसेफ पाकिस्तान की एक अलग रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 12 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 15 लाख पाकिस्तानी बच्चे, जो इंटरनेट का उपयोग करते हैं, एक साल के भीतर ऑनलाइन यौन शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार हुए।
क्या समाधान सुझाया गया?
HRCP का कहना है कि केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। मजबूत सुरक्षा प्रणालियों, संस्थागत जवाबदेही और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की अधिक जिम्मेदारी की जरूरत है। आयोग ने व्यापक रणनीति अपनाने का आह्वान किया है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और मौजूदा कानूनी तथा संस्थागत तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान में ऑनलाइन शोषण के बड़े पैमाने पर होने के और सबूत सामने आ रहे हैं। (इनपुट-एजेंसी)


