पीएम मोदी ने BRICS Reform Roadmap का दिया प्रस्ताव, वैश्विक शासन में सुधार पर जोर

भारत की BRICS अध्यक्षता को ‘people-centric’ और ‘humanity first’ दृष्टिकोण पर आधारित बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया। 18वें BRICS Summit के ‘Inclusive Global Governance and Strengthening’ सत्र में उन्होंने BRICS की एकता और सहमति को ठोस वैश्विक परिणामों में बदलने, संगठन की कार्यप्रणाली में निरंतरता सुनिश्चित करने और Global South को decision-making में अधिक प्रभावी भूमिका देने के प्रस्ताव रखे। पीएम मोदी ने अगले Summit तक global governance reform के 10 proposals तैयार कर उन्हें BRICS Reform Roadmap का रूप देने का सुझाव दिया।

भारत की BRICS अध्यक्षता में 350 से अधिक बैठकें

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता ‘people-centric’ और ‘humanity first’ approach पर आधारित रही। Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability इसकी प्रमुख प्राथमिकताएं रहीं। इसी सोच के तहत 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में BRICS देशों की टीमों का स्वागत किया गया। उन्होंने अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों के योगदान और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

BRICS की 20वीं वर्षगांठ को बताया ऐतिहासिक पड़ाव

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का BRICS Summit ऐतिहासिक पड़ाव है, क्योंकि संगठन अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने 20 वर्ष की आयु को maturity और responsibility के नए चरण की शुरुआत बताते हुए कहा कि BRICS भी अब अपने ‘coming of age’ के क्षण में है। पिछले 20 वर्षों में संगठन ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए consensus के आधार पर आगे बढ़े हैं।

अगले 20 वर्षों के लिए नए ambitious agenda की जरूरत

पीएम मोदी ने कहा कि अब समय है कि BRICS की एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए। अगले 20 वर्षों के लिए एक नया और ambitious agenda तैयार करना होगा और इसकी शुरुआत BRICS के अपने working system से करनी होगी।

Continuity and Implementation Mechanism का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है, लेकिन इससे संगठन का institutional momentum नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने BRICS Continuity and Implementation Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत Troika के माध्यम से initiatives और outcomes का follow-up किया जा सकेगा। उन्होंने एक secure digital repository बनाने का भी सुझाव दिया, जिसमें प्रत्येक निर्णय के साथ nodal point, समय-सीमा और implementation status दर्ज किया जा सके।

‘Pyramid of Privilege’ को ‘Platform of Partnership’ में बदलने का आह्वान

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मौजूदा Global Governance structure एक pyramid जैसा दिखाई देता है, जिसके ऊपरी हिस्से में power और decision-making केंद्रित है, जबकि निचले हिस्से में वे देश हैं जो फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें आकार नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि Global South आज वैश्विक संकटों की front row में है, लेकिन decision-making की back row में। इस ‘pyramid of privilege’ को ‘platform of partnership’ में बदलना होगा, जहां हर देश की आवाज और हर सदस्य का stake हो।

10 प्रस्तावों वाला BRICS Reform Roadmap

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रस्ताव रखा कि BRICS देश मिलकर global governance reform के 10 proposals तैयार करें और अगले Summit तक उन्हें BRICS Reform Roadmap का रूप देने का प्रयास करें। उन्होंने इसके लिए Representation, Responsiveness और Rule-making को तीन मुख्य पहलुओं के रूप में रेखांकित किया।

UN Security Council Reform को अब और नहीं टाल सकते

Representation के तहत पीएम मोदी ने कहा कि UN Security Council में reform अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने text-based negotiations को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणाम से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने financial institutions में voting power, leadership positions और policy priorities को मौजूदा economic realities के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया।

वैश्विक संस्थानों की responsiveness बढ़ाने पर जोर

Responsiveness के संबंध में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संस्थानों में मानवता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब वे समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में सक्षम होंगे। इसके लिए collective response के speed, scale और last-mile impact पर ध्यान देना होगा।

Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव

पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार में Seafarers का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन मुश्किल समय में उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिलती। उन्होंने Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से संबंधित देशों की Maritime authorities और missions को जोड़ा जा सकता है, जिससे distress alerts, medical assistance, परिवारों को सूचना और evacuation में सहयोग दिया जा सकेगा।

Global South को rule-taker से rule-shaper बनाने पर जोर

Rule-making के तहत प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य के global rules तय करने में समान भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। AI, cyberspace, outer space, biotechnology और critical technologies भविष्य के अवसरों के साथ वैश्विक नियमों को भी आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि Global South को rule-taker से rule-shaper बनाने के लिए BRICS के माध्यम से युवा diplomats और policymakers को negotiation skills, practical training और legal expertise उपलब्ध कराई जा सकती है।

South-South Cooperation Day का उल्लेख

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि इसी दिन United Nations Day for South-South Cooperation है। Global South को समर्पित इस दिन ऐसा निर्णय लेना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत इस विषय में lead लेने के लिए तैयार है।

‘यदि भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित BRICS Summit का संदेश स्पष्ट होना चाहिए—यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने कहा, “From voice to impact. From privilege to partnership.” यही BRICS at 20 का संकल्प होना चाहिए। (इनपुट: पीआईबी)

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