प्रधानमंत्री मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा से रणनीतिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 से 4 जुलाई 2025 के बीच त्रिनिदाद और टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। गौरतलब है कि पीएम मोदी की यह विदेशी दौरा घाना (2-3 जुलाई) से शुरू होकर अर्जेंटीना (4-5 जुलाई), ब्राजील (5-8 जुलाई) और नामीबिया (9 जुलाई) तक चलेगी। वहीं त्रिनिदाद और टोबैगो की सरकार ने इस यात्रा को भारत और कैरेबियाई देश के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण बताया है। त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच 1962 से चले आ रहे राजनयिक संबंधों में काफी अहम साबित होगी।” यह पीएम मोदी की पहली त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा है और 1999 के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी।

यह यात्रा वित्त, विदेश नीति, न्याय, शिक्षा, विधिक मामलों, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार, ऊर्जा, संस्कृति, खेल और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है। इस दौरान द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है।

विदेश मंत्रालय (MEA) की सचिव (दक्षिण), नीना मल्होत्रा ने बताया कि यह यात्रा भारत के “ग्लोबल साउथ” फोकस को और आगे बढ़ाती है, जिसकी शुरुआत G20 के दौरान “वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट” से हुई थी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब त्रिनिदाद और टोबैगो भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ मना रहा है।”

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू और प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर से मुलाकात करेंगे। साथ ही वह देश की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। यह संबोधन भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और दोनों देशों के गहरे संबंधों का प्रतीक होगा। उल्लेखनीय है कि त्रिनिदाद की संसद में स्पीकर की कुर्सी भारत द्वारा भेंट की गई थी, जो दोनों देशों के बीच संसदीय परंपराओं की गहराई को दर्शाती है।

भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के रिश्ते एक जीवंत भारतीय प्रवासी समुदाय द्वारा और मजबूत होते हैं। कुल 1.36 मिलियन की आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग 40-45 प्रतिशत तक हैं। ये प्रवासी वर्ष 1845 से यहां आए थे और आज भी भारत से गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच ऐतिहासिक और गहरे संबंधों को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ विकास साझेदारी को भी और व्यापक बनाएगी, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुदान आधारित परियोजनाएं और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। -(ANI)

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