रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के आगामी भारत दौरे से दोनों देशों के बीच रणनीतिक, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिणाम सामने आने की उम्मीद है। यह बात मंगलवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कही। इंडिया हैबिटेट सेंटर में स्पुतनिक न्यूज द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में पेस्कोव ने कहा कि यह दौरा भारत और रूस के संबंधों को और मजबूत करेगा, जिनकी नींव “आपसी समझ, साझेदारी और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की साझा दृष्टि” पर आधारित है।
रूस प्रतिस्पर्धी कीमतों पर भारत को ऊर्जा की आपूर्ति जारी रखेगा
उन्होंने कहा कि भारत के विकास के अहम चरणों में रूस हमेशा “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़ा रहा है। पेस्कोव के अनुसार, रणनीतिक और रक्षा सहयोग “संवेदनशील क्षेत्रों” में शामिल है, लेकिन रूस नई और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना अनुभव भारत के साथ साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऊर्जा क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रूस प्रतिस्पर्धी कीमतों पर भारत को ऊर्जा की आपूर्ति जारी रखेगा, जो “दोनों देशों के लिए लाभकारी” है।
भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार, वर्ष 2030 से पहले 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार करने का संकल्प
परमाणु ऊर्जा के मोर्चे पर भी उन्होंने मौजूदा सहयोग और भविष्य की परियोजनाओं की पुष्टि की। उनके अनुसार, रूसी सहयोग की बदौलत भारत के परमाणु उद्योग में “एक अलग सेक्टोरल इकोसिस्टम” विकसित हुआ है। भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल 63 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और दोनों देशों ने वर्ष 2030 से पहले 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार करने का संकल्प लिया है।
पुतिन के आगमन से एक दिन पहले दोनों देशों के उद्योगपतियों की एक बिजनेस मीटिंग आयोजित होगी
उन्होंने स्वीकार किया कि “कुछ शक्तियां” इस व्यापारिक संबंध को बाधित करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन रूस इन चुनौतियों के बावजूद संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। व्यापार संतुलन सुधारने के प्रयास के तहत रूस भारत से आयात बढ़ाने पर सक्रियता से काम कर रहा है। पेस्कोव ने बताया कि पुतिन के आगमन से एक दिन पहले दोनों देशों के उद्योगपतियों की एक बिजनेस मीटिंग आयोजित होगी, जिसमें भारतीय निर्यात बढ़ाने के अवसर तलाशे जाएंगे।
रूस शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध
यूक्रेन संघर्ष पर उन्होंने भारत की संतुलित कूटनीति की सराहना की और प्रधानमंत्री मोदी के बयान “यह युद्ध का युग नहीं है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रूस भारत के रुख को महत्व देता है और संवाद के लिए तैयार है, जबकि यूरोपीय देशों की ओर से बातचीत का माहौल नहीं बन पाया है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ कुछ बातचीत जारी है और रूस शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है। चीन से बढ़ते रिश्तों पर उन्होंने स्पष्ट किया, “रूस भारत की अनुमति की सीमा में रहकर ही हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है।”
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ रूस
उन्होंने रक्षा मामलों को भी संभावित चर्चा का विषय बताया। फिलहाल भारत के रक्षा आयातों में रूस की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है। दिल्ली में हाल में हुए धमाके की निंदा करते हुए पेस्कोव ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ रूस की “लंबे समय से चली आ रही एकजुटता” दोहराई। बातचीत में चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर, चाबहार पोर्ट सहयोग और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में राष्ट्रीय मुद्राओं के बढ़ते उपयोग (डि-डॉलराइजेशन) पर भी चर्चा होगी। पेस्कोव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की “अनिश्चितता” के बीच कई देश राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। (इनपुट: आईएएनएस)


