भूटान में 17 दिनों की प्रदर्शनी के बाद पवित्र अवशेष भारत लौटे; भूटान नरेश ने की औपचारिक विदाई

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भूटान में 17 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भारत वापस आ गए हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले एवं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पवित्र अवशेषों की वापसी यात्रा में उनके साथ थे। उन्होंने भूटान के नेतृत्व एवं जनता के प्रति उनकी असाधारण गर्मजोशी, भक्ति और औपचारिक सम्मान के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।

कल मंगलवार को पालम हवाई अड्डे पर पहुंचने पर पवित्र अवशेषों को आईबीसी के महानिदेशक अभिजीत हलदर, भिक्षुओं, संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय संग्रहालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्राप्त किया। संस्‍कृति मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है।

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि “भूटान में पवित्र बुद्ध अवशेषों की पवित्र प्रदर्शनी के बाद उन्हें भारत वापस लाकर मैं स्वयं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। पवित्र अवशेषों के प्रति भूटान की गहरी श्रद्धा दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे सामंजस्य को अभिव्यक्त करती है। औपचारिक विदाई के दौरान भूटान नरेश की व्यक्तिगत देखभाल और अनुग्रहपूर्ण उपस्थिति से मैं अत्यंत अभिभूत हूं।”

रिजिजू ने पवित्र अवशेषों के लिए की गई सावधानीपूर्वक व्यवस्था और 11 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यादगार भूटान यात्रा के लिए भूटान के प्रधानमंत्री, भूटान के मंत्रिमंडल के सदस्यों, केंद्रीय मठ निकाय के लेत्सोग लोपेन, भिक्षुओं और भूटान की शाही सरकार को हार्दिक धन्यवाद दिया।

आपको बता दें, वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के अंतर्गत, पवित्र बुद्ध पिपरहवा अवशेषों को 8 से 25 नवंबर 2025 तक थिम्पू के त्राशिछोद्ज़ोंग के ग्रैंड कुएनरे हॉल में प्रतिष्ठित किया गया था, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंगलवार सुबह, भूटान के नरेश ने ग्रैंड कुएनरे में विशेष प्रार्थना में भाग लिया, जिसके बाद अवशेषों को राजकीय जुलूस के रूप में पारो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ले जाया गया, जहां से उन्हें सम्मानपूर्वक भारत वापस लाया गया। इस समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री लेत्सोग लोपेन, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और भारत तथा भूटान के प्रतिष्ठित भिक्षुओं ने भाग लिया। भूटान नरेश ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से भी मुलाकात की, जो अवशेषों को स्वदेश लाने के लिए विशेष रूप से भूटान आए थे।

दरअसल, बौद्ध जगत की सर्वाधिक पूजनीय वस्तुओं में से एक, पवित्र बुद्ध अवशेष, भारत की ओर से मित्रता के एक विशेष प्रतीक के रूप में भूटान लाए गए थे। इनकी प्रदर्शनी ने पूरे भूटान में अपार श्रद्धा का संचार किया और उस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु की पुष्टि की जो दोनों देशों को एक सूत्र में पिरोए हुए है। 

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