बहन के ‘रखवाले’ ने रखा राखी का मान, नहीं होने दिया ‘सिंदूर’ का सौदा 


‘अधर्म’ के नाश और धर्म की स्थापना के लिए शस्त्र उठाना, ये हमारी परंपरा है। इसलिए जब हमारी बहनों, बेटियों का सिंदूर छीना गया तो हमने आतंकवादियों के फन को उनके घर में घुसकर कुचल दिया।’ इन शब्दों को सुनकर भी जिसके रोंगटे खड़े न हुए उसके लिए इस देश की भावना और आज के नेतृत्व की वचनबद्धता का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आदमपुर एयरबेस में जांबाजों के बीच दुश्मन को कड़ा संदेश देते हुए हिमालय से भी ऊंचे मनोबल वाले देश का निर्णायक नेतृत्व नजर आया। लाखों करोड़ों मां को एक बेटा तो बहनों को एक ऐसा भाई नजर आया जिसने सावित्री की धरती पर मांग उजाड़ने वाले राक्षसों को मिट्टी में मिला कर राखी का मान रखा तो अंतर्राष्ट्रीय ताकतों या घर में छिपे ‘जयचदों’ के दबाव में भी ‘सिंदूर’ का सौदा नहीं होने दिया। ऑपरेशन सिंदूर के रूप में शौर्य, शक्ति ऐसी कहानी लिखी गई है जिसे आने वाले वक्त में पूरी दुनिया दोहराएगी कि भारत ने आतंक को कैसे नेस्तनाबूद कर दिया। 


‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम के मायने?

भारत की सभ्यता और संस्कृति को समझने वाले इस बात से सहमत होंगे कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम का चयन संयोगवश नहीं हुआ होगा। यह नाम भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक ताने-बाने में गहराई से निहित है। ‘सिंदूर’, यहां केवल एक कॉस्मेटिक नहीं है बल्कि यह भारतीय नारी के सम्मान का प्रतीक है। इस मिशन को ‘सिंदूर’ नाम देकर, एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस सोच के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है जो महिलाओं की गरिमा पर नजर डालने की गलती करे। अगर गौर करें तो स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ सालों में, पीएम मोदी ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा के लिए एक ‘राष्ट्रीय चेतना’ जागृत की है। महिलाएं सुरक्षित, मजबूत और सम्मानित महसूस करें, फैसलों में ये उनकी प्राथमिकता साफ नजर आती है। चाहे वह ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान हो या सशस्त्र बलों और महत्वपूर्ण मिशनों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, ये तमाम बदलाव आज के भारत को नए सिरे से परिभाषित करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर भी इस नए भारत का ही एक प्रतीक है। जो सिर्फ आतंक को खत्म करने भर के लिए नहीं था बल्कि यह आधी आबादी को यह संदेश भी देता है कि ‘आप सिर्फ सुरक्षित ही नहीं बल्कि आप खुद रक्षक भी हैं।’

भारत की सांस्कृतिक चेतना का सैन्य प्रतिशोध

कल तक जो तालियां बजा रहे थे सीजफायर पर पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए झूठ के जाल में फंसते ही दुश्मन की बोली बोलने लगे। ऐसे लोगों को समझना होगा कि ’ऑपरेशन ‘सिंदूर’ कोई साधारण सैन्य कार्रवाई नहीं है बल्कि यह भारत की आधी आबादी, हमारी माताओं-बहनों के स्वाभिमान की पुकार है। यह उस संस्कृति की ललकार है, जहां मां दुर्गा और काली को पूजा जाता है। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना का वह उग्र रूप है, जिसमें अन्याय के सामने झुकना पाप है। यह अभियान आतंकवादियों के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई जरूर है, लेकिन इसके मायने कहीं गहरे हैं। यह उस परंपरा की याद दिलाता है जहां रावण जैसे राक्षसों का संहार करने के लिए स्वयं श्रीराम निकलते हैं। तो पूरा देश उनकी वापसी पर दीपक जलाता है और आप उसी देश के साहस और संस्कृति को दुश्मन की चाल में फंस कर झूठा साबित करने पर तुले हैं।

महिला शक्ति के प्रति अटूट कमिटमेंट

इस ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ रखना ही अपने आप में एक शक्तिशाली संदेश था। यह पीएम मोदी की सोच को दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण को नारे की तरह नहीं, संकल्प की तरह जिया जा सकता है। पहलगाम में इस देश की बेटियों की मांग उजाड़ने वालों को उनके घर में घुस कर नेस्तनाबूद कर इस देश ने अब यह साफ कर दिया है कि महिला सुरक्षा केवल ‘वोट बैंक’ का मुद्दा नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा का प्रश्न है। यह वही सोच है जिसने साइंटिस्ट से लेकर फाइटर पायलट तक, महिलाओं को हर मोर्चे पर आगे रखा है।

आतंक के सफाए के साथ आत्मसम्मान का उद्घोष

ऑपरेशन सिंदूर के रूप में भारत ने इस बार केवल आतंकी शिविरों को ध्वस्त नहीं किया बल्कि करोड़ों महिलाओं को यह अहसास हुआ है कि उनका अपमान अब किसी राजनीतिक बयानबाजी में गुम नहीं होगा। एक प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने भारत की बेटियों को यह भरोसा दिलाया है कि देश का नेतृत्व उनके मान के साथ खड़ा है। यह ऑपरेशन एक रणनीतिक विजय तो है ही, साथ ही यह उस सोच को भी जवाब है जिसने भारतीय स्त्री को कमजोर समझा। भारत में बहनें केवल भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधतीं, वे अब वायुसेना के फाइटर जेट भी उड़ाती हैं। दुश्मन की छाती पर गोलियां भी दागती हैं। नए भारत की बेटियां अब केवल सीमाओं की रक्षक नहीं हैं, सीमाओं की लक्ष्मण रेखाएं तय करने वाली शक्ति बन चुकी हैं। आर्मी ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह की मौजूदगी ने बताया कि युद्ध सिर्फ गोलियों से नहीं, विचारों से भी लड़ा जाता है। विचारों की शक्ति ही असल ‘शक्ति’ है।


मां दुर्गा और काली की भूमि

आतंक के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आदमपुर एयरबेस से कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर कोई सामान्य सैन्य अभियान नहीं है, ये भारत की नीति, नीयत और निर्णायक क्षमता की त्रिवेणी है। भारत की ओर नजर उठाने वाले का एक ही अंजाम होगा, ऐसा करने वाले की तबाही होगी।’ ये लाइनें दुश्मन के लिए स्पष्ट संदेश है कि यह देश उस संस्कृति से पला-बढ़ा है जहां स्त्री को ‘देवी’ कहा जाता है। ऑपरेशन सिंदूर उस देवी के रौद्रता का पुनर्जागरण था, जो हर भारतीय स्त्री के भीतर कहीं न कहीं सजीव है। इसलिए अगर अपनी खैर चाहते हैं तो नापाक इरादे रखने वालों को ये गलती भूल से भी नहीं दोहरानी चाहिए। 

साहस और संस्कृति का आह्वान 

इस ऑपरेशन के दौरान जब देश के प्रधानमंत्री ने बहनों से उस भाई के रूप में बात की, जिसकी राखी उम्मीद से बंधी है। हर उस मां से बेटे के रूप में बात की जो अपने बच्चे को शक्ति का आशीर्वाद देती है। न सिर्फ आतंकवाद बल्कि आज भारत में, किसी भी महिला की गरिमा के लिए खतरा बनने वाले के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक राष्ट्रीय आह्वान है। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर ने घर के बाहर या अंदर बैठे दरिंदो को साफ संदेश दिया है कि अगर कोई भारत की महिलाओं का सिंदूर पोंछने की हिमाकत करेगा, तो उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा। कुल मिला कर ऑपरेशन सिंदूर एक मिशन से कहीं बढ़कर बन चुका है। यह भारत की पहचान का आईना है। यह हमारी ताकत, हमारी संस्कृति, हमारी आध्यात्मिक विरासत और हमारी आधुनिक शक्ति को दर्शाता है।

-(अनुभवी पत्रकार अमित शर्मा को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ है)