आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की दूसरी बैठक 15 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने भाग लिया, जिनमें सदानंद म्हालु शेट तानावडे, अष्टिकर पाटिल नागेश बापूराव और नीलेश डी. लंके प्रमुख रूप से शामिल थे।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने किसानों के सशक्तिकरण, आयुष क्षेत्र को मजबूत करने और जैव विविधता के संरक्षण में औषधीय पौधों की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचे में एकीकृत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सके और एक टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सशक्त पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की नींव उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता पर आधारित होती है, जो औषधीय पौधों से प्राप्त गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की सतत आपूर्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि स्रोत स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने से अधिक प्रभावी और त्वरित स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) की पहलों का उल्लेख किया, जो पिछले 25 वर्षों से “औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन” से संबंधित केंद्रीय क्षेत्र योजना का कार्यान्वयन कर रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए 139 परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 1161.96 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस कार्य में देशभर में स्थापित सात क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा, “ई-चरक” डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़कर बाजार संपर्क को मजबूत किया गया है।
जाधव ने कृषि विद्यापीठों और कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए कहा कि इनके माध्यम से किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। बैठक के अंत में उन्होंने सदस्यों के सक्रिय योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुझाव आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा में भारत की नेतृत्व भूमिका को भी मजबूत करेंगे।
(इनपुट- PIB)


