मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीक से न केवल देश के मछुआरों की आय बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब पारंपरिक मछली उत्पादन की सीमाओं से आगे बढ़कर बाजारोन्मुख उद्यमिता के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

उत्पादन से आगे बढ़कर पूरा मूल्य श्रृंखला पर फोकस

खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करने तथा समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं, बुनियादी ढांचे में निवेश और तकनीकी नवाचारों के परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला में बदलाव देखने को मिल रहा है। मत्स्य विभाग ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि मछली उत्पादन के साथ-साथ अब उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, भंडारण और विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट मत्स्य उत्पादों की बढ़ती मांग ने मूल्य संवर्धन आधारित कारोबार के लिए नए अवसर खोले हैं। इससे उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। साथ ही फसलोत्तर नुकसान भी कम हो रहा है। 

39,272 करोड़ रुपये का निवेश

मत्स्य क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 से सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की है। नीली क्रांति योजना, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई), प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से कुल 39,272 करोड़ रुपये की राशि प्रतिबद्ध की गई है। इन योजनाओं से देशभर के 74.66 लाख मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका को सहारा मिल रहा है।

लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट बाजारों का विस्तार

मत्स्य उत्पादों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन व लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। 3,393.85 करोड़ रुपये के निवेश से मछली परिवहन प्रणालियों, थोक व खुदरा बाजारों, फिश कियोस्क, फीड मिल, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और मूल्य संवर्धित उद्यम इकाइयों सहित 46,500 सुविधाओं का विकास किया गया है। इसके अलावा पांच आधुनिक एवं स्मार्ट मछली बाजार विकसित किए जा रहे हैं। इनमें उन्नत आईटी, हरित तकनीक और आधुनिक लॉजिस्टिक्स प्रणालियों को एकीकृत किया जा रहा है। इनसे लगभग 15,900 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

एआई, आईओटी और ड्रोन जैसी तकनीकों का बढ़ता उपयोग

मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। उद्यमों और मत्स्य पालकों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ब्लॉकचेन, ड्रोन और स्मार्ट कोल्ड चेन जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इनकी मदद से पानी की गुणवत्ता की निगरानी, उत्पादन प्रबंधन, रोगों की पहचान, उत्पादों की ट्रेसबिलिटी और आपूर्ति शृंखला की निगरानी बेहतर हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल आधारित विपणन से उत्पादकों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो रही है।

आनुवंशिक सुधार और उच्च मूल्य वाली प्रजातियां

मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की नियमित उपलब्धता जरूरी है। इसके लिए मछलियों की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने की पहल की जा रही है। ट्राउट, झींगा, कतला, रोहू, तिलापिया, पंगासियस, सीबास और स्कैम्पी जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

एफएफपीओ और सहकारिता मॉडल

छोटे मछुआरों और मत्स्य पालकों को संगठित कर बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए सामूहिक उद्यम मॉडल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग ने अब तक 2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के गठन में सहयोग दिया है। कई एफएफपीओ को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) से भी जोड़ा गया है। पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत एनसीडीसी, नेफेड, एसएफएसी और एनईआरएएमएसी जैसी एजेंसियों के सहयोग से 5,500 मत्स्य सहकारी समितियों को एफएफपीओ के रूप में मजबूत किया जा रहा है।

महिलाओं के लिए नए अवसर

मूल्य संवर्धन ने महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। मछली सुखाने, अचार, पापड़, स्मोक्ड फिश, मछली पाउडर, पैकेजिंग और खुदरा बिक्री जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों के हित में 4,155 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 1,572 करोड़ रुपये है। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। (इनपुट-एजेंसी)