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एआई से टेक्नोलॉजी सेवा उद्योग में 400 अरब डॉलर तक की वृद्धि की उम्मीद

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं से वर्ष 2030 तक 100-200 अरब डॉलर के नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके लिए जरूरी प्रतिभाओं का बड़ा हिस्सा पहले से ही प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों में मौजूद है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एआई आधारित सेवाओं से 2030 तक उद्योग की वृद्धि में 300-400 अरब डॉलर का योगदान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा राजस्व अनुबंधों में लगभग 200 अरब डॉलर की कमी आने की आशंका है। इसके चलते नए कारोबारी अवसरों का शुद्ध मूल्य 100-200 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बदलाव में मुख्य चुनौती प्रतिभाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि मौजूदा कर्मचारियों के कौशल का सही इस्तेमाल करना है। प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों के एआई से जुड़े कर्मचारियों में से केवल 10-15 प्रतिशत एप्लाइड एआई के क्षेत्र में काम करते हैं। इसके विपरीत, एआई आधारित कंपनियों में यह अनुपात 90-95 प्रतिशत है। प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों के बाकी 85-90 प्रतिशत कर्मचारी इन्फ्यूज्ड एआई के दायरे में आते हैं, जहां पेशेवर अपने मौजूदा काम को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग करते हैं।

बीसीजी के मुताबिक, उद्योग में 300-400 अरब डॉलर की वृद्धि एजेंटिक सॉल्यूशंस विकसित करने और उनका संचालन करने से हो सकती है। एजेंटिक एआई टूल्स के विकास के साथ ऐसी सेवाओं को बाहरी कंपनियों से लेना यानी आउटसोर्स करना भी अधिक व्यावहारिक होता जाएगा।

रिपोर्ट में वैश्विक सेवा बाजार के भी विस्तार का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार, यह बाजार 2025 में लगभग 1.6-1.7 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 2.2-2.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।

बीसीजी की मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर स्रेइशा जॉर्ज ने कहा कि एप्लाइड एआई के क्षेत्र में काम करने में सक्षम लोग पहले से ही काफी हद तक कंपनियों के पेरोल पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहक अब काम के घंटों के आधार पर भुगतान करने के बजाय हासिल किए गए नतीजों के आधार पर भुगतान करने की ओर बढ़ रहे हैं। इससे कर्मचारियों की तैनाती और उनके पारिश्रमिक के तरीकों में बदलाव आएगा।

रिपोर्ट में एप्लाइड एआई से जुड़ी 40 अलग-अलग भूमिकाओं की पहचान की गई है। इनमें से प्रत्येक भूमिका को प्रौद्योगिकी क्षेत्र की किसी मौजूदा भूमिका से जोड़ा गया है। उदाहरण के लिए, डेटा साइंटिस्ट या फुल-स्टैक डेवलपर आगे चलकर फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर की भूमिका निभा सकता है। इसी तरह, डेवऑप्स इंजीनियर एआई ऑप्स इंजीनियर और डेटा इंजीनियर सेमांटिक इंजीनियर के रूप में आगे बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, किसी डेटा साइंटिस्ट को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर की भूमिका के लिए तैयार करने में उतने प्रयास की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कौशल विकास की जरूरत होती है, जितनी एक डेटा इंजीनियर को एआई डेटा इंजीनियर बनाने में पड़ती है। इससे स्पष्ट होता है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को कर्मचारियों के कौशल विकास और नई भूमिकाओं के अनुरूप प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा।

-(इनपुटः आईएएनएस)

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