केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दौरा कर विशेष अभियान 6 के तहत स्वच्छता, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की पहलों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एम्स ट्रॉमा सेंटर एक्सटेंशन कैंपस में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए नवनिर्मित प्रतीक्षालय का निरीक्षण किया। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), गाजियाबाद ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत इस सुविधा का निर्माण किया है। प्रस्तावित ‘आश्रय’ शेल्टर में 897 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित, गरिमापूर्ण और मौसम की कठिनाइयों से बचाने वाला स्थान उपलब्ध कराना है।
विशेष अभियान 6 के तहत स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एम्स में स्वच्छता अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। इनमें अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, शौचालयों का रखरखाव और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपाय शामिल हैं। संस्थान ने सफाई व्यवस्था को नियमित और प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय
एम्स में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए ‘गैंग वॉशिंग’, आपातकालीन विभाग और बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के शौचालयों में समर्पित सफाईकर्मियों की तैनाती तथा दिन के अंत में ओपीडी की विशेष सफाई जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके अलावा सफाईकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। समय पर वेतन भुगतान, सफाई सामग्री की उपलब्धता और मशीनीकृत सफाई उपकरणों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जल संरक्षण से लेकर बिजली की खपत घटाने तक पहल
एम्स ने जल और ऊर्जा संरक्षण के लिए भी कदम उठाए हैं। संस्थान में 11 अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र हैं, जिनमें ऑनलाइन निगरानी और स्मार्ट मीटरिंग की व्यवस्था है। उपचारित अपशिष्ट जल का लगभग 19.6 लाख लीटर प्रतिदिन बागवानी के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। ऊर्जा संरक्षण के तहत वातानुकूलन प्रणाली का जरूरत के अनुसार उपयोग करने और आवश्यकता नहीं होने पर उपकरण बंद रखने जैसे उपाय अपनाए गए हैं। इनके परिणामस्वरूप बिजली की खपत में 7.68 लाख किलोवाट-घंटे की कमी दर्ज की गई, जो 10.5% की गिरावट के बराबर है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान वर्ष 2024 की समान अवधि की तुलना में बिजली खर्च में करीब 1.98 करोड़ रुपए की कमी आई।
मरीजों और तीमारदारों के लिए मुफ्त इलेक्ट्रिक शटल सेवा
परिसर में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एम्स मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए 40 मुफ्त इलेक्ट्रिक वाहन शटल सेवाएं संचालित करता है। इसके अलावा, परिसर में स्मार्ट निगरानी प्रणाली से संचालित 30 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर और चार स्थानों पर 114 समर्पित पावर पॉइंट उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के साथ ऊर्जा के अधिक टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
2,970 वर्ग मीटर में बना ‘आश्रय’ शेल्टर
स्वच्छता संबंधी समीक्षा के बाद नड्डा ने एम्स ट्रॉमा सेंटर एक्सटेंशन कैंपस में नवनिर्मित प्रतीक्षालय का निरीक्षण किया। इस भवन का कुल निर्मित क्षेत्र 2,970 वर्ग मीटर है और इसमें 897 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। भवन में प्राथमिक और द्वितीयक प्रतीक्षा क्षेत्र, प्रवेश और निकास द्वार, रैंप, शौचालय तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। बीईएल, गाजियाबाद ने इस सुविधा का निर्माण अपनी सीएसआर पहल के तहत किया है। इसे ‘आश्रय’ शेल्टर के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव है, ताकि इलाज के लिए एम्स आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके तीमारदारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान मिल सके।
तंबुओं की जगह मिलेगा स्थायी और ढका हुआ विकल्प
प्रस्तावित आश्रय सुविधा का उद्देश्य अस्थायी तंबुओं में रुकने की मजबूरी को कम करना है। यहां मरीजों और उनके परिजनों को मौसम की कठिनाइयों से बचने के लिए ढका हुआ स्थान मिलेगा। इससे ठहरने की परिस्थितियों में सुधार होने के साथ स्वच्छता और आराम की सुविधाएं भी बेहतर हो सकती हैं। अस्पताल के आसपास खुले स्थानों में रुकने वाले लोगों को भी इस व्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद है। एम्स में ‘आश्रय’ को 24 घंटे संचालित होने वाली मानवीय आश्रय सुविधा के रूप में चलाया जाता है। यह मुख्य रूप से दिल्ली से बाहर के क्षेत्रों से इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके साथ आए लोगों की सहायता करती है।
सफाईकर्मियों से संवाद, उनके योगदान को सराहा
दौरे के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स के सफाईकर्मियों से बातचीत की और अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में उनकी भूमिका को सराहा। उन्होंने स्वच्छ और स्वास्थ्यकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सफाईकर्मियों के योगदान के महत्व को रेखांकित किया। अस्पतालों में संक्रमण के जोखिम को कम करने और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में सफाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्वच्छता को नियमित व्यवस्था बनाने पर जोर
विशेष अभियान 6 के तहत एम्स में की जा रही पहलें स्वच्छता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और मरीजों के अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा हैं। जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए संस्थान अपने संचालन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इस दौरे ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित साफ-सफाई, प्रभावी कचरा प्रबंधन और मरीजों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का जोर स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय संस्थागत कार्यप्रणाली का स्थायी हिस्सा बनाने पर है। (इनपुट: पीआईबी)


