4 hours ago | Israel

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इजरायल में अहम ‘नेसेट’ चुनावों के लिए मतदान जारी, राष्ट्रपति हर्जोग ने डाला वोट

नेसेट सदस्यों को चुनने के लिए इजरायल में वोटिंग जारी है। इस चुनाव में लगभग 73 लाख (7.3 मिलियन) लोग मतदान करने के पात्र हैं। मंगलवार को राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग, बेन ग्विर समेत कई हस्तियों ने अपने मतों का प्रयोग किया।

चुनाव से ठीक पहले आए अंतिम ओपिनियन पोल के अनुसार, मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गुट और इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट की ‘यशार’ पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुटों के बीच कड़ा मुकाबला होने के संकेत हैं।

‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दोनों पक्ष अपने चुनावी वादों पर कायम रहते हैं तो किसी भी पक्ष को संसद में बहुमत मिलने की संभावना कम है।

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग और उनकी पत्नी मिशाल हर्जोग, देश के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने भी अपना वोट डाला। स्थानीय समयानुसार रात 10 बजे मतदान खत्म होने के तुरंत बाद एग्जिट पोल आने की उम्मीद है, जिनसे नतीजों का शुरुआती संकेत मिल सकता है। वहीं, वोटों की गिनती पूरी होने के बाद आने वाले दिनों में आधिकारिक नतीजे घोषित किए जाएंगे।

इस बीच, न्यूज़ एजेंसी से ​​बात करते हुए एक स्थानीय नागरिक ने लोगों से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। ​​उन्होंने कहा, “हर किसी को बाहर निकलकर वोट देना चाहिए। 18 साल से ऊपर के सभी को आना चाहिए, अपनी बात रखनी चाहिए और अपना वोट डालना चाहिए।” एक अन्य स्थानीय नागरिक ने इस चुनाव के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मेरे हिसाब से, इजरायल के इतिहास में यह सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है।”

वहीं, इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के पूर्व मेजर एरियल एवरबुच ने चिंता जताई कि इस चुनाव के नतीजे से एक राजनीतिक गतिरोध पैदा हो सकता है, जिसकी वजह से देश में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। न्यूज़ एजेंसी से उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि कल मुकाबला टाई हो सकता है, जिससे हमें एक और चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। मुझे लगता है कि अंत में दक्षिणपंथी गुट – जिसका नेतृत्व शायद नेतन्याहू करेंगे – जीत जाएगा, लेकिन मुझे चिंता है कि कल मुकाबला टाई हो सकता है।”

इजरायल की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के नेतन्याहू के तरीके की तारीफ करते हुए, एवरबुच ने हिजबुल्लाह, हमास, ईरान और हूती विद्रोहियों जैसे कई मोर्चों पर प्रधानमंत्री के रुख की सराहना की।

उन्होंने कहा, “…यह कहना कि लोग खुश नहीं हैं, असल में सच नहीं है, क्योंकि जब यहूदियों के ‘होलोकॉस्ट’ (नरसंहार) के बाद सबसे भयानक आतंकी हमला हुआ, तब वे ही देश की कमान संभाल रहे थे। लेकिन उस हमले के बाद, युद्ध के दौरान नेतन्याहू का रवैया बहुत सराहनीय रहा है। देखिए, कई लोग हिजबुल्लाह पर हुए ‘पेजर’ हमले, हमास के खिलाफ कार्रवाई, गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से पर इजरायल का नियंत्रण, ईरान पर हमला और हूती विद्रोहियों के खिलाफ उनके साथ हैं। इन सभी मोर्चों पर नेतन्याहू ने बहुत सख्ती और मजबूती से काम किया है।”

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले के बाद यह पहला चुनाव है। 2022 के चुनावों के बाद से राजनीतिक परिदृश्य में काफी बदलाव आए हैं और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को तय करने वाले मुद्दों में भी बड़ा अंतर आया है। (इनपुट-आईएएनएस)