प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को SME ग्रोथ फंड (SGF) की स्थापना के लिए भारत सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता को मंजूरी दे दी। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को विकास-उन्मुख पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें विनिर्माण, सेवा, प्रौद्योगिकी और नवाचार-संचालित क्षेत्रों में ‘चैंपियन’ कंपनियों के रूप में उभरने में सक्षम बनाना है।
बजट 2026-27 की घोषणा को मिली अमल की मंजूरी
यह फैसला केंद्रीय बजट 2026-27 के पैरा 28 में की गई घोषणा का हिस्सा है। बजट में पूरे MSME इकोसिस्टम को इक्विटी, लिक्विडिटी और पेशेवर सहायता देने का लक्ष्य रखा गया था। अभी तक मौजूद ज्यादातर फंड शुरुआती चरण के या सूक्ष्म (माइक्रो) उद्यमों पर केंद्रित हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए दीर्घकालिक इक्विटी ग्रोथ कैपिटल की कमी बनी हुई थी। SME ग्रोथ फंड इसी संरचनात्मक कमी को दूर करने के लिए लाया गया है।
उच्च-क्षमता वाले SME को मिलेगा पेशेंट ग्रोथ कैपिटल
यह फंड उन उच्च-क्षमता वाले SME को लंबे समय के लिए विकास-उन्मुख इक्विटी पूंजी (पेशेंट ग्रोथ इक्विटी कैपिटल) मुहैया कराएगा, जिनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता और विस्तार की क्षमता साबित हो चुकी है। फंड से आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र के छोटे और मध्यम उद्यमों को दिया जाएगा। साथ ही टियर-II और टियर-III शहरों के इंडस्ट्रियल क्लस्टर में काम करने वाले SME पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
क्या फायदे होंगे?
– उद्यम अपने कामकाज का विस्तार कर सकेंगे
– उन्नत तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में निवेश कर सकेंगे
– अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ा सकेंगे
– ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ सकेंगे
– रणनीतिक अधिग्रहण और निवेश कर सकेंगे
सरकार को उम्मीद है कि इससे ऐसी भारतीय कंपनियों की मजबूत पाइपलाइन तैयार होगी, जिनमें अपने सेक्टर में चैंपियन बनने के लिए जरूरी स्केल, नवाचार क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता होगी।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा कदम
यह पहल भारत के उद्यमिता इकोसिस्टम को मजबूत करने, विकास के चरण वाले उद्यमों के लिए घरेलू पूंजी बाजार को गहरा करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम कंपनियों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। SME ग्रोथ फंड के जरिए सरकार अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) में कुल 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इससे संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास, स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होने और अच्छी गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है। सरकार ने दोहराया कि यह कदम MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए चल रहे सुधारों, डिजिटलीकरण, क्रेडिट सपोर्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसी पहलों को और मजबूती देगा। यह ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। (इनपुट-पीआईबी)


