राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार कर डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 15 सितंबर 2026 तक देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50,00,92,730 टेलीकंसल्टेशन दर्ज किए गए। यह उपलब्धि खासतौर पर ग्रामीण, दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में टेलीमेडिसिन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
देशभर में तेजी से बढ़ा ई-संजीवनी का नेटवर्क
ई-संजीवनी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े टेलीमेडिसिन कार्यान्वयनों में शामिल है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.42 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर के प्रतिनिधियों, 19,473 चिकित्सा केंद्रों और 901 ऑनलाइन ओपीडी को सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसके नेटवर्क में 2,41,923 पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता शामिल हैं। अंग्रेजी और 14 भारतीय भाषाओं समेत 15 भाषाओं में उपलब्ध यह प्लेटफॉर्म प्रतिदिन बड़ी संख्या में टेलीकंसल्टेशन की सुविधा प्रदान करता है।
महिलाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी
ई-संजीवनी के उपयोग के आंकड़े बताते हैं कि यह सेवा उन वर्गों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है, जिन्हें भौतिक स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में यात्रा, समय या अन्य व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कुल टेलीकंसल्टेशन में महिलाओं की हिस्सेदारी 57.14% है, जबकि 46 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों ने 40.15% परामर्श लिए हैं। इनमें 16.25% परामर्श 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा लिए गए।
एआई आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से मजबूत हुई सेवा
टेलीमेडिसिन सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए ई-संजीवनी में नई तकनीकों को लगातार जोड़ा जा रहा है। प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम को एकीकृत किया गया है। यह प्रणाली परामर्श के दौरान स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सहायता देती है और नैदानिक निर्णय लेने की गुणवत्ता, निरंतरता तथा दक्षता को बेहतर बनाने में मदद करती है। इस नवाचार को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
ईआरएसएस-112 से भी किया गया एकीकरण
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से मजबूत करने के लिए ई-संजीवनी को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस)-112 के साथ भी एकीकृत किया गया है। इससे आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं और दूरस्थ चिकित्सा विशेषज्ञता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य जरूरत के समय नागरिकों को चिकित्सा सहायता तक अधिक समन्वित और प्रभावी पहुंच उपलब्ध कराना है।
अब विशेषज्ञ ओपीडी परामर्श भी उपलब्ध
ई-संजीवनी अब केवल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से विशेषज्ञ ओपीडी परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। एम्स जोधपुर, एम्स जम्मू और एम्स पटना में चुनिंदा विशेषज्ञताओं के लिए रोगी-से-चिकित्सक टेलीकंसल्टेशन सेवाएं शुरू की गई हैं। इससे मरीज घर से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले सकते हैं।
एम्स और अन्य संस्थानों तक होगा विस्तार
विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के विस्तार से मरीजों को लंबी दूरी की यात्रा और बड़े चिकित्सा संस्थानों में परामर्श के लिए इंतजार करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है। इस सुविधा को धीरे-धीरे एम्स, जेआईपीएमईआर और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ जैसे अन्य प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों तक भी विस्तारित किया जाएगा। इससे व्यक्तिगत ओपीडी सेवाओं को पूरक बनाने के साथ देखभाल की निरंतरता मजबूत होगी।
प्राथमिक से विशेषज्ञ देखभाल तक बना डिजिटल सेतु
विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन का विस्तार ई-संजीवनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से परामर्श की शुरुआत करने वाला यह प्लेटफॉर्म अब मरीजों को विभिन्न स्तरों की स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हो रहा है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में उपलब्ध विशेषज्ञ क्षमता का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव होगा।
सी-डैक ने विकसित किया मेड-इन-इंडिया समाधान
ई-संजीवनी एक स्वदेशी डिजिटल स्वास्थ्य समाधान है, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। सी-डैक मोहाली ने प्लेटफॉर्म की शुरुआत से ही इसके तकनीकी विकास और इंजीनियरिंग सहायता की जिम्मेदारी संभाली है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश की बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप प्लेटफॉर्म के निरंतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की क्षमता का प्रदर्शन
मंत्रालय और प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच निरंतर सहयोग और नवाचार के जरिए ई-संजीवनी अपने शुरुआती हब-एंड-स्पोक मॉडल से विकसित होकर व्यापक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मंच बन चुका है। 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वदेशी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
ई-संजीवनी की 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन की उपलब्धि भारत की डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्राथमिक और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुंच, एआई आधारित तकनीक और आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं के एकीकरण तथा प्रमुख चिकित्सा संस्थानों तक विस्तार के साथ यह प्लेटफॉर्म सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभर रहा है। इसका निरंतर विस्तार भौगोलिक बाधाओं को कम करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भूमिका को रेखांकित करता है। (इनपुट: पीआईबी)


