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भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग का विस्तार, मेघराज से जुड़े 2,330 सरकारी विभाग

भारत में डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती जरूरतों के बीच क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर का विस्तार तेजी से हो रहा है। सरकार घरेलू क्लाउड बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मेघराज पहल, इंडियाAI मिशन और निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे रही है। सितंबर 2026 तक मेघराज क्लाउड व्यवस्था से 2,330 सरकारी विभाग जुड़ चुके हैं, जबकि देश की डेटा सेंटर क्षमता अगस्त 2026 में बढ़कर 1.57 गीगावाट हो गई।

क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिये इंटरनेट पर डेटा स्टोरेज, सर्वर, सॉफ्टवेयर और कंप्यूटिंग क्षमता जैसी सुविधाएं जरूरत के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती हैं। इससे संस्थानों को अपने सर्वर और अन्य उपकरण खरीदने तथा उनका रखरखाव करने पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, डिजिटल सेवाओं को तेजी से शुरू करना, जरूरत के अनुसार कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना और डेटा का बैकअप सुरक्षित रखना आसान होता है।

सरकार के अनुसार, देश में डिजिटल गतिविधियों के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा भी बढ़ रही है। मार्च 2026 तक भारत में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 109.279 करोड़ पहुंच गई थी। वायरलेस डेटा का औसत इस्तेमाल प्रति ग्राहक प्रति माह 25.51 जीबी रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल वायरलेस डेटा खपत 2,85,376 पेटाबाइट दर्ज की गई। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और एआई एप्लिकेशन के बढ़ते उपयोग से सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल बुनियादी ढांचे की जरूरत बढ़ी है।

घरेलू क्लाउड व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 2014 में मेघराज पहल शुरू की थी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना और सार्वजनिक क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर होने वाले खर्च का बेहतर उपयोग करना है। मेघराज 2.0 के तहत सरकारी विभागों को जरूरत के अनुसार क्लाउड सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके माध्यम से डिजिलॉकर, माईगव, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और डाक विभाग की एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी जैसी डिजिटल सेवाओं को होस्ट किया जा रहा है।

सितंबर 2026 तक भारत में 30 क्लाउड सेवा प्रदाताओं को सरकारी उपयोग के लिए सूचीबद्ध किया गया था। इनमें जियो प्लेटफॉर्म्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बीएसएनएल, आईटीआई लिमिटेड, रेलटेल, अडानीकॉननेक्स और योट्टा डेटा सर्विसेज जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं। गूगल क्लाउड, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन वेब सर्विसेज और ओरेकल जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इस सूची में हैं। इन प्रदाताओं का बुनियादी ढांचा मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर सहित विभिन्न स्थानों पर मौजूद है।

क्लाउड सेवाओं का उपयोग सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, अस्पताल ऑनलाइन अपॉइंटमेंट प्रणाली शुरू करने, स्कूल विद्यार्थियों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और ऑनलाइन परीक्षा पोर्टल जरूरत के अनुसार अपनी कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए क्लाउड का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्लाउड आधारित बैकअप से उपकरण खराब होने या तकनीकी व्यवधान की स्थिति में डेटा बहाल करने में भी मदद मिलती है।

भारत में घरेलू क्लाउड के उपयोग का एक उदाहरण डिजिटल इंडिया भाषिणी मंच है। फरवरी 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया था कि भाषिणी को योट्टा डेटा सर्विसेज द्वारा संचालित भारतीय क्लाउड पर स्थानांतरित किया गया। इसके तहत भाषा संबंधी डेटा, एआई मॉडल और नागरिकों के साथ होने वाली बातचीत को भारत के अधिकार क्षेत्र में रखने में मदद मिली। इस तैनाती से प्रदर्शन में 40 प्रतिशत तक सुधार, लागत में 20-30 प्रतिशत बचत और 99.99 प्रतिशत अपटाइम हासिल होने की जानकारी दी गई। महाकुंभ 2025 के दौरान भाषिणी ने 11 से अधिक भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय में अनुवाद और आवाज आधारित सहायता उपलब्ध कराई थी।

देश में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अगस्त 2026 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.57 गीगावाट थी, जिसके 2030 तक लगभग 8 गीगावाट पहुंचने का अनुमान है। मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र हैं। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी नए डेटा सेंटर केंद्र उभर रहे हैं। इस क्षेत्र में लगभग 70 अरब डॉलर का निवेश जारी है, जबकि 90 अरब डॉलर की अतिरिक्त परियोजनाओं की घोषणा की गई है।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) देश के सरकारी डेटा सेंटर नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह देशभर में चार राष्ट्रीय डेटा सेंटर और 24 मिनी डेटा सेंटर संचालित करता है। ये केंद्र सरकारी विभागों को साझा होस्टिंग, को-लोकेशन और क्लाउड सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

एआई के क्षेत्र में कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने के लिए इंडियाAI मिशन भी काम कर रहा है। 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट वाली इस पहल के तहत साझा एआई कंप्यूटिंग सुविधा के लिए 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) उपलब्ध कराए गए हैं। इससे स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को एआई एप्लिकेशन विकसित करने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता मिल सकती है।

क्लाउड क्षेत्र के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग भी बढ़ रही है। फ्यूचरस्किल्स प्राइम कार्यक्रम के तहत अगस्त 2026 तक 34 लाख उम्मीदवार पंजीकृत हुए थे, जिनमें से 23 लाख से अधिक प्रशिक्षण ले चुके थे या प्रशिक्षण में शामिल थे। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) के 56 केंद्र, 750 संबद्ध संस्थान और 9,000 से अधिक सुविधा केंद्र क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देते हैं।

क्लाउड सेवाओं के चयन और डेटा सुरक्षा के लिए सरकार ने नीतिगत उपाय भी किए हैं। मार्च 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने क्लाउड चयन ढांचा जारी किया, जिसमें डेटा की संवेदनशीलता और महत्वपूर्णता के आधार पर क्लाउड बुनियादी ढांचा चुनने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें एनआईसी और राज्य डेटा सेंटर जैसी सरकारी क्लाउड सेवाओं को प्राथमिकता देने तथा सूचीबद्ध सेवा प्रदाताओं के साथ हाइब्रिड क्लाउड मॉडल अपनाने की व्यवस्था शामिल है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण और सीमापार डेटा हस्तांतरण से जुड़े प्रावधान भी हैं। सरकार का कहना है कि घरेलू डेटा सेंटर और क्लाउड क्षमताओं का विकास डिजिटल संप्रभुता, सुरक्षित सरकारी सेवाओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

-(इनपुटः पीआईबी)

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