वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकॉक में ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और जापान के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें वित्तीय और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई।
विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वार्षिक बैठकों से इतर ब्रिटेन के वित्त मंत्री जॉन हीली के साथ बैठक में निर्मला सीतारमण ने चौथे भारत-ब्रिटेन वित्तीय बाजार संवाद, वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) बैठकों और उनसे जुड़ी भारत-ब्रिटेन वित्तीय साझेदारी (आईयूकेएफपी) की बैठकों के सफल आयोजन पर चर्चा की। ये बैठकें पिछली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता (ईएफडी) के नतीजों को आगे बढ़ाने के लिए हुईं।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए लिखा कि दोनों पक्ष दिसंबर, 2026 में अगली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता आयोजित करने पर सहमत हुए। निर्मला सीतारमण ने साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिटेन के साथ मिलकर काम करने और G20 की प्रक्रिया को रचनात्मक एवं समावेशी बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
स्विट्जरलैंड की संघीय परिषद की सदस्य और वित्त मंत्रालय की प्रमुख कैरीन केलर-सटर के साथ अलग बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) को जल्द अंतिम रूप देने पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन, मजबूत घरेलू मांग और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण से भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। इससे स्विट्जरलैंड के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होते हैं। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) और गिफ्ट सिटी के जरिये निवेश के अवसरों पर भी विचार किया।
मंत्रालय ने साथ ही बताया कि सीमा पार डिजिटल भुगतान, वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक), नियामकीय नवाचार और वित्तीय सेवाओं में कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल में सहयोग पर भी चर्चा हुई।
जापान की वित्त मंत्री सत्सुकी कातायामा के साथ बैठक में सीतारमण ने भारत-जापान रणनीतिक वैश्विक साझेदारी की समीक्षा की और भारत में एक लाख करोड़ येन (जापान की मुद्रा) के निजी निवेश को सुगम बनाने की जापान की प्रतिबद्धता का स्वागत किया। उन्होंने उच्चस्तरीय बैठकों के जरिये राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए जापानी पक्ष को 2027 में भारत आने का लिखित निमंत्रण सौंपा।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-जापान कोष की राशि का बड़ा हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक परिवहन, महत्वपूर्ण खनिजों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने जापान विकास बैंक की एनआईआईएफ के निजी बाजार कोष में निवेश करने की प्रतिबद्धता का भी स्वागत किया और विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे में आगे सह-निवेश की संभावनाओं का उल्लेख किया।’’
उन्होंने जापान के संस्थानों को भारत में बढ़ते दीर्घकालिक बचत कोष में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। इसमें हरित बुनियादी ढांचे और पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) मानकों से जुड़े पेंशन उत्पादों के जरिये निवेश भी शामिल है। उन्होंने भारत की उभरती वरिष्ठ नागरिक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए पेंशन की दीर्घकालिक स्थिरता, वार्षिकी उत्पादों की रूपरेखा और दीर्घकालिक देखभाल के वित्तपोषण में जापान की विशेषज्ञता भी मांगी।
दोनों मंत्रियों ने भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक ऑफ जापान के बीच सहयोग पर चर्चा की। इसमें वित्तीय प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए औपचारिक ढांचा, केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा के इस्तेमाल के संभावित तरीके और जापान की 2027 में अपनी भुगतान प्रणाली ‘जेंगिन’ के आधुनिकीकरण की योजना के बीच भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के अनुभव को साझा करना शामिल था।
बैठक में साइबर सुरक्षा सहयोग और वित्तीय सेवाओं में एआई की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री सीतारमण ने जापानी बैंकों, बीमा कंपनियों, पुनर्बीमा कंपनियों, परिसंपत्ति प्रबंधकों और विश्वविद्यालयों को गिफ्ट सिटी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (गिफ्ट आईएफएससी) में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए भी आमंत्रित किया।
दोनों पक्षों ने भारत तथा जापान के बीच आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर सहमति जताई। सीतारमण विश्व बैंक-आईएमएफ की वार्षिक बैठकों तथा G20 और G7 के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठकों में शामिल होने के लिए 18 अक्टूबर तक बैंकॉक की आधिकारिक यात्रा पर हैं। (भाषा)


