भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं की शुरुआत फिलहाल गृह मंत्रालय (MHA) की सुरक्षा मंजूरी पर निर्भर है। संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने गुरुवार को कहा कि सभी सैटेलाइट संचार कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक समान चरण में हैं।
भारत मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 से इतर पेम्मासानी ने कहा कि दूरसंचार विभाग (DoT) पहले ही सैटेलाइट संचार सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से जुड़ी अस्थायी मंजूरियां दे चुका है। हालांकि, सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी गृह मंत्रालय की सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगी।
उन्होंने कहा, “अब मामला सुरक्षा मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास लंबित है। जैसे ही मंजूरी मिलती है, उन्हें यह मिल जाएगी। इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।”
मंत्री का यह बयान केंद्र सरकार द्वारा SpaceX के संस्थापक एलन मस्क के उन आरोपों को खारिज करने के कुछ घंटे बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत सैटेलाइट संचार सेवाओं के नियमों को भेदभावपूर्ण तरीके से लागू कर रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाएं शुरू करने की इच्छा रखने वाले सभी ऑपरेटरों के लिए निष्पक्ष और भेदभावरहित मंजूरी व्यवस्था लागू है।
संचार मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि गैर-भूस्थिर उपग्रह नेटवर्क के जरिए सेवाएं देने वाले तीन Global Mobile Personal Communication by Satellite (GMPCS) सेवा प्रदाताओं को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि सभी लाइसेंसधारियों के लिए समान नियामकीय और सुरक्षा संबंधी अनुपालन आवश्यकताएं लागू हैं।
मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं उपयोगकर्ताओं और उनके डेटा की सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करें। तीनों लाइसेंसधारियों के लिए सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Starlink समेत कई कंपनियां भारत में वाणिज्यिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
सरकार का कहना है कि सभी आवेदकों के साथ समान व्यवहार किया जा रहा है और नियामकीय फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं के आधार पर लिए जा रहे हैं।
-(इनपुटः IANS)


