विश्वभर में 2024 में मलेरिया से 6 लाख से अधिक मौतें, दवा प्रतिरोध बना गंभीर खतरा: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2024 के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 28.2 करोड़ लोग मलेरिया से संक्रमित हुए और 6,10,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि दवा प्रतिरोध (drug resistance) मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

WHO ने बताया कि उसकी अनुशंसित मलेरिया वैक्सीनों ने 2024 में अनुमानित 17 करोड़ संक्रमणों और 10 लाख मौतों को रोकने में मदद की। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 लाख अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया से होने वाली 95 प्रतिशत मौतें अफ्रीका क्षेत्र में हुईं, जिनमें अधिकतर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं।

रिपोर्ट ने कहा कि वैश्विक तकनीकी रणनीति (GTS) 2016–2030 के तहत मलेरिया से होने वाली मौतों को कम करने के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति लक्ष्य से काफी पीछे है। WHO ने बताया कि कम से कम 8 अफ्रीकी देशों में मलेरिया-रोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोध की पुष्टि या आशंका दर्ज की गई है। साथ ही, आर्टेमिसिनिन आधारित संयोजन दवाओं की प्रभावशीलता में भी कमी के संकेत मिल रहे हैं।

रिपोर्ट में अन्य जोखिमों का भी उल्लेख है—जैसे मलेरिया परजीवी के pfhrp2 जीन विलोपन, जिससे रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट की विश्वसनीयता घट रही है; और 48 देशों में पायरिथ्रॉयड प्रतिरोध के कारण कीटनाशक-युक्त मच्छरदानियों की प्रभावशीलता कम होना।


इसी तरह Anopheles stephensi प्रजाति के मच्छरों—जो कई कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधी हैं—का 9 अफ्रीकी देशों में फैलाव शहरी मलेरिया नियंत्रण के लिए नया खतरा बन गया है।

हालांकि सकारात्मक प्रगति भी सामने आई है। अब तक दुनिया के 47 देशों और एक क्षेत्र को WHO द्वारा मलेरिया-मुक्त प्रमाणित किया जा चुका है। वर्ष 2024 में केप वर्डे और मिस्र को मलेरिया-मुक्त घोषित किया गया, जबकि जॉर्जिया, सूरीनाम और तिमोर-लेस्ते 2025 में इस सूची में शामिल हुए।

WHO के अनुसार, दुनिया का पहला मलेरिया टीका 2021 में स्वीकृत हुआ था और अब तक 24 देशों ने इसे अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया है।

WHO महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि मलेरिया रोकथाम के नए उपकरण उम्मीद दे रहे हैं, लेकिन बढ़ते मामलों, बढ़ते दवा प्रतिरोध और वित्तीय कटौती जैसे कारक बीते दो दशकों की प्रगति को उलट सकते हैं।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान और वर्षा में उतार-चढ़ाव, तथा संघर्ष और अस्थिरता जैसी स्थितियाँ मलेरिया के प्रसार को बढ़ावा दे रही हैं। पिछले दशक में वैश्विक फंडिंग के स्थिर रहने से भी मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों पर असर पड़ा है।

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि चुनौतियाँ गंभीर हैं, लेकिन असंभव नहीं। यदि प्रभावित देश नेतृत्व दिखाएं और लक्षित निवेश हो, तो मलेरिया-मुक्त विश्व का लक्ष्य अब भी हासिल किया जा सकता है।

-(इनपुटःएजेंसी)

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