13/05/26 | 12:08 pm

Print

पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित के माध्यम से शक्ति और सामर्थ्य के सामंजस्य का बताया महत्व

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए शक्ति और सामर्थ्य के सामंजस्य का महत्व बताया। उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों को भारत के अटूट संकल्प का प्रतीक भी बताया।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा यह संदेश

इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि 11 मई 1998 को हुए परमाणु परीक्षणों ने दुनिया को भारत की इच्छाशक्ति का परिचय कराया था। परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया, लेकिन भारत ने दिखा दिया कि कोई भी ताकत उसे झुका नहीं सकती।

पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित किया साझा

प्रधानमंत्री ने पोस्ट में संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। इसमें कहा गया है कि शक्ति और शक्तिमान एक-दूसरे पर आश्रित हैं तथा शिव के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं।

प्रधानमंत्री ने लिखा:

“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।
न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”

सुभाषित का अर्थ

इस सुभाषित का अर्थ है कि शक्ति और सामर्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस प्रकार शिव के बिना शक्ति अधूरी है और शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं, उसी प्रकार किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शक्ति और उसके सही उपयोग का संतुलन आवश्यक है। (इनपुट-एजेंसी)

RELATED ARTICLES

34 mins ago | Agriculture Development India

पीएम मोदी ने गिनाए किसानों के लिए सरकार के प्रयास, कहा- अन्नदाता विकसित भारत के मजबूत स्तंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में विभिन्न विकास परियोजनाओं के...

60 mins ago | Agriculture Scheme

किसानों की आय सुरक्षा का बड़ा आधार बना पीएम-किसान, 24 किस्तों में 4.64 लाख करोड़ रुपए वितरित

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त के तहत 9.34 करोड़ से अधिक पात्र किस...