विश्व टेलीविजन दिवस हर वर्ष 21 नवंबर को मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1996 में पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से मान्यता दी गई थी। यह दिवस टेलीविजन को सूचना, शिक्षा, जनमत निर्माण तथा वैश्विक संवाद और समझ बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित करता है।
भारत में, जहाँ 230 मिलियन से अधिक टेलीविजन घरों के माध्यम से लगभग 900 मिलियन दर्शक जुड़े हैं, यह दिवस सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और इसकी सार्वजनिक प्रसारण इकाई प्रसार भारती के अंतर्गत मनाया जाता है। दूरदर्शन और आकाशवाणी द्वारा आयोजित कार्यक्रम सार्वजनिक सेवा संचार, विकास संदेशों के प्रसार और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में टेलीविजन की भूमिका को रेखांकित करते हैं।
भारत में टेलीविजन सूचना और मनोरंजन का सबसे प्रभावशाली माध्यम बना हुआ है, जो लाखों घरों से जुड़कर सार्वजनिक जागरूकता और सहभागी शासन के उद्देश्यों में योगदान देता है।
क्या आप जानते हैं?
भारत का मीडिया एवं मनोरंजन (M&E) क्षेत्र ने 2024 में ₹2.5 ट्रिलियन का आर्थिक योगदान दिया और 2027 तक ₹3 ट्रिलियन से अधिक तक पहुँचने का अनुमान है। केवल टेलीविजन एवं प्रसारण खंड ने 2024 में लगभग ₹680 बिलियन उत्पन्न किए। यह विकास डिजिटल विस्तार, 4K प्रसारण, स्मार्ट टीवी, 5G और 600 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले OTT प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित है।
भारत में टेलीविजन का विकास
भारत में टेलीविजन की यात्रा 1950 के दशक के सामुदायिक शिक्षण प्रसारण से शुरू होकर आज बहु-चैनल, पूर्णत: डिजिटल नेटवर्क बनने तक पहुँचती है। यह विकास सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को दर्शाता है।
प्रायोगिक और प्रारंभिक चरण (1959–1965)
भारत में टेलीविजन प्रसारण 15 सितंबर 1959 को ऑल इंडिया रेडियो द्वारा प्रयोगात्मक रूप से प्रारंभ किया गया। यह सेवा UNESCO के सहयोग से शिक्षा और सामुदायिक विकास हेतु शुरू हुई थी। प्रसारण क्षेत्रीय रूप से सीमित थे तथा सामग्री स्कूल शिक्षा और ग्रामीण upliftment पर केंद्रित थी।
विस्तार और संस्थागतकरण (1965–1982)
1965 में नियमित दैनिक प्रसारण शुरू हुए और दूरदर्शन एक अलग टेलीविजन सेवा के रूप में स्थापित हुआ। इस अवधि में मुंबई (1972), श्रीनगर, अमृतसर, कोलकाता (1973–75) और चेन्नई (1975) सहित नए केंद्र खोले गए।
महत्वपूर्ण उपलब्धि:
1975–76 का SITE (Satellite Instructional Television Experiment), जिसे ISRO और NASA ने संचालित किया—यह 2,400 गाँवों तक शैक्षिक कार्यक्रम सीधे प्रसारित करने वाला विश्व का सबसे बड़ा सैटेलाइट आधारित शिक्षण प्रयोग था।
दूरदर्शन ने समाचार, शिक्षा, ग्रामीण विकास, उच्च शिक्षा (UGC) और क्षेत्रीय भाषा प्रसारण सहित बहुआयामी सार्वजनिक प्रसारण मॉडल विकसित किया।
1980 के दशक तक दूरदर्शन का राष्ट्रीय ढाँचा, विकासोन्मुख सामग्री और तकनीकी क्षमता स्थापित हो चुकी थी।
रंगीन प्रसारण और राष्ट्रीय कवरेज (1982–1990)
1982 एशियाई खेलों के दौरान रंगीन प्रसारण की शुरुआत भारत के प्रसारण इतिहास में एक मील का पत्थर थी। 1990 तक दूरदर्शन की पहुंच देश की 70% आबादी और 80% भौगोलिक क्षेत्र तक फैल चुकी थी। क्षेत्रीय केंद्रों की भूमिका भी मजबूत हुई, जिससे भाषाई और सांस्कृतिक विविधता बढ़ी।
उदारीकरण और सैटेलाइट युग (1991–2011)
1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद निजी सैटेलाइट चैनल शुरू हुए—
स्टार टीवी (1991)
ज़ी टीवी (1992)
सोनी एंटरटेनमेंट (1995)
दूरदर्शन ने DD National, DD Metro, DD News, DD India और राज्य-आधारित केंद्रों के माध्यम से सार्वजनिक सेवा प्रसारण जारी रखा।
2004 में DD Direct Plus भारत की पहली निशुल्क DTH सेवा के रूप में शुरू हुई, जिससे दूरदराज़ क्षेत्रों में पहुँच बढ़ी।
क्या आप जानते हैं?
प्रसार भारती अधिनियम, 1990 ने भारत के स्वायत्त सार्वजनिक प्रसारक की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। 23 नवंबर 1997 को यह पूर्ण रूप से लागू हुआ और दूरदर्शन एवं AIR निगम के अधीन लाए गए।
डिजिटलीकरण और आधुनिक प्रसारण (2012–वर्तमान)
2012–2017 के बीच केबल टीवी डिजिटलीकरण लागू किया गया। DD Free Dish, भारत का एकमात्र फ्री-टू-एयर DTH प्लेटफॉर्म, 2024 तक लगभग 50 मिलियन घरों तक पहुँच गया। आज भारत का टीवी नेटवर्क देश का सबसे व्यापक मास मीडिया प्लेटफॉर्म बना हुआ है।
शैक्षिक पहलें
टेलीविजन ने भारत में शिक्षा की पहुँच बढ़ाने, कौशल विकास और शिक्षक प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभाई है, विशेषकर DD Free Dish और दूरदर्शन के माध्यम से।
COVID-19 के दौरान शैक्षिक प्रसारण
स्कूल बंद होने पर दूरदर्शन ने पाठ्यक्रम-आधारित सामग्री, शिक्षण सत्र और विषय विशेष कार्यक्रम लाखों छात्रों तक पहुँचाए।
PM e-Vidya कार्यक्रम
“One Class – One Channel” मॉडल के तहत NCERT आधारित कक्षाएँ I–XII के लिए 12 DTH चैनल शुरू किए गए, जो दूरदर्शन के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं और DIKSHA, SWAYAM, NCERT संसाधनों से एकीकृत हैं।
SWAYAM Prabha शैक्षिक चैनल
GSAT उपग्रहों के माध्यम से 24×7 प्रसारण; सामग्री IITs, UGC, IGNOU, NCERT और NIOS द्वारा विकसित; DTH प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध।
दर्शक और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
31 मार्च 2025 तक भारत में 918 निजी सैटेलाइट चैनल अधिकृत थे—
908 डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध
333 पे चैनल (232 SD + 101 HD)
टेलीविजन रोज़गार, जानकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की पहुँच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार
भारत का प्रसारण क्षेत्र डिजिटल तकनीक, अवसंरचना और नीति सुधारों से बदल रहा है।
डिजिटल टेरिस्ट्रियल प्रसारण (DTT)
DVB-T2 मानक अपनाया गया; पुराने एनालॉग ट्रांसमीटर अधिकतर चरणबद्ध रूप से बंद किए गए, जबकि सीमित क्षेत्र में रणनीतिक कारणों से सक्रिय हैं।
DD Free Dish का विस्तार
2014 → 59 चैनल
2025 → 482 चैनल
MPEG-2 (SD) और MPEG-4 (HD) स्लॉट उपलब्ध।
नियामकीय सुधार
TRAI ने टेलीकॉम अधिनियम 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं के लिए नई सिफारिशें जारी कीं, OTT एकीकरण और गुणवत्तापूर्ण सेवा पर जोर दिया।
भारत का टेलीविजन क्षेत्र डिजिटल परिवर्तन के नए युग में प्रवेश कर चुका है—जहाँ उच्च-गुणवत्ता प्रसारण, उपग्रह सेवाएँ, AI आधारित सामग्री, और क्षेत्रीय भाषाओं में नवाचार इसे अधिक समावेशी बना रहे हैं।
1959 के विनम्र आरंभ से लेकर आज 900 मिलियन दर्शकों को जोड़ने तक, टेलीविजन भारत की प्रगति का दर्पण और संदेशवाहक रहा है। यह जागरूकता, समावेशन और राष्ट्रीय संचार का आधार स्तंभ बना रहेगा, एक जुड़े हुए और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान देते हुए।


