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ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिका का बड़ा प्रतिबंध, कई कंपनियां और जहाज निशाने पर

अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार पर एक बड़ा नया कदम उठाते हुए कई कंपनियों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग ईरान से जुड़े उत्पादों के लेनदेन को आसान बनाने में मदद कर रहे थे।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि उसने कई कंपनियों पर कार्रवाई की है जो ईरान की ‘अवैध तेल अर्थव्यवस्था’ से जुड़ी हुई हैं। विभाग के मुताबिक, इन कदमों का मकसद ईरान की उस आमदनी को रोकना है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी सैन्य गतिविधियों और ‘अस्थिरता फैलाने वाली’ गतिविधियों के लिए करता है।

दरअसल, यह कार्रवाई एक बड़े प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है, जिसमें उन व्यापारियों, शिपिंग कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है जिन पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के परिवहन का आरोप है।

विदेश विभाग ने कहा, “आज की यह कार्रवाई उन तीन कंपनियों को भी निशाना बनाती है जो ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का व्यापार कर रही थीं और उनके एक प्रमुख अधिकारी को भी।” विभाग ने कहा कि ऐसी कंपनियां ईरान सरकार को ‘महत्वपूर्ण आमदनी’ देती हैं। ये प्रतिबंध कतर, सिंगापुर, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मार्शल आइलैंड्स में स्थित कंपनियों पर लगाए गए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने आठ जहाज प्रबंधन कंपनियों को भी चिह्नित किया है और आठ जहाजों को प्रतिबंधित संपत्ति घोषित किया है। आरोप है कि ये कंपनियां ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद, बिक्री, ढुलाई और मार्केटिंग में शामिल थीं।

विभाग के अनुसार, ईरान का निर्यात कई देशों में फैले शिपिंग नेटवर्क के जरिए भेजा जाता है। कुछ जहाजों पर आरोप है कि वे ‘अवैध हुई गतिविधियों’ और अन्य चालाक तरीकों का इस्तेमाल करके ईरानी माल को ढो रहे थे।

साथ ही, अमेरिकी वित्त विभाग ने एक ऐसे तेल बिक्री नेटवर्क पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो कथित तौर पर ईरान के करोड़ों बैरल तेल की आवाजाही में मदद कर रहा था। विदेश विभाग ने कहा कि यह नेटवर्क सीधे तौर पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी), ईरान के सशस्त्र बलों के मुख्यालय और सैन्य तंत्र के अन्य हिस्सों को फंडिंग दे रहा था। (इनपुट-आईएएनएस)

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