भारत की अध्यक्षता में आज से 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक, गुरुग्राम में जुटेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक गुरुवार से गुरुग्राम में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करने के लिए एक मंच पर जुटेंगे।

‘सभी के लिए ऊर्जा’ थीम पर होगा फोकस

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी (ब्रिक्स)’ है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए भारत ने ‘सभी के लिए ऊर्जा’ विषय को अपनाया है, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

11 देशों का समूह, वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी

वर्तमान में ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक जीडीपी में लगभग 40% योगदान देते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों पर होगी चर्चा

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और बढ़ती ऊर्जा मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। सदस्य देश ऊर्जा सुरक्षा, किफायती ऊर्जा और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे।

भारत की प्राथमिकताओं से मेल खाता है ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडा

ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडा भारत की सतत विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाना, ग्रिड रेजिलिएंस में सुधार, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित है भारत की अध्यक्षता

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडा को तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित किया है। इनमें ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता, ऊर्जा तक पहुंच और स्वामित्व तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार शामिल हैं।

विकसित भारत 2047 विजन में ऊर्जा की अहम भूमिका

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उत्पादक और उपभोक्ता होने के साथ-साथ भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में सुरक्षित, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की आधारशिला माना जा रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां

बैठक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करेगी। पिछले एक दशक में देश ने सौर ऊर्जा क्षमता में 50 गुना से अधिक वृद्धि की है। इसके अलावा 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और वर्ष 2032 तक 410 गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का विस्तार

भारत ने बिजली पारेषण और वितरण ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण के लिए राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार किया गया है और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजनाओं को गति दी गई है।

बायोफ्यूल क्षेत्र में भी दर्ज की प्रगति

देश ने बायोफ्यूल क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। 20% इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। साथ ही हाल ही में ई85 ईंधन की शुरुआत की गई है, जिसमें 80-85% इथेनॉल का मिश्रण होता है।

वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा दे रहा भारत

भारत वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का प्रमुख समर्थक बनकर उभरा है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों के माध्यम से भारत समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को मिलेगा बल

ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को भी आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा।

बैठक से सहयोग को मिलेगी नई दिशा

आधिकारिक बयान के अनुसार, ऊर्जा मंत्रियों की यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करेगी तथा सुरक्षित, किफायती, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा प्रणाली के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने में मददगार साबित होगी। (इनपुट: आईएएनएस)

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