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पढ़ने की क्षमता में गिरावट के पीछे सिर्फ AI नहीं, बदल रही सीखने की दुनिया

PISA की ताजा रिपोर्ट में छात्रों की पढ़ने की क्षमता में लगातार गिरावट सामने आने के बाद स्कूलों में AI और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ी है। कुछ जगहों पर AI पर रोक लगाने की कोशिश हो रही है, लेकिन केवल AI को स्कूलों से दूर रखने से पढ़ने की क्षमता में गिरावट की मूल समस्या खत्म नहीं होगी।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सितंबर में प्री-स्कूल से आठवीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में छात्रों के सामने जनरेटिव AI के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ हाई स्कूल छात्रों के लिए AI को समझने और उसके आलोचनात्मक इस्तेमाल से जुड़े पाठ शुरू करने की भी योजना है।

लेख के अनुसार, पढ़ने की क्षमता में बदलाव केवल AI की वजह से नहीं आया है। समाज लंबे समय से लिखित संस्कृति से ऐसी डिजिटल और मौखिक संस्कृति की ओर बढ़ रहा है, जिसमें बातचीत, सुनना, तुरंत प्रतिक्रिया और इंटरनेट आधारित जानकारी का महत्व बढ़ गया है। AI इसी बड़े बदलाव का नया हिस्सा है।

विशेषज्ञ एरिक हैवलॉक और वाल्टर जे. ओंग के विचारों का हवाला देते हुए लेख बताता है कि जिस तरह लिखने की तकनीक ने प्राचीन समाजों में सीखने और ज्ञान को सुरक्षित रखने के तरीके बदले थे, उसी तरह डिजिटल तकनीक आज सीखने की आदतों को बदल रही है। इंटरनेट पर जानकारी तेजी से मिलती है, लेकिन गलत और अपुष्ट जानकारी की जांच करना भी जरूरी हो गया है।

लेख के मुताबिक, स्कूलों की मौजूदा शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था उस दौर में विकसित हुई थी, जब लंबे समय तक किसी लिखित पाठ पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को महत्वपूर्ण माना जाता था। आज तकनीकी बदलाव के कारण सीखने और जानकारी हासिल करने के तरीके बदल रहे हैं। इसलिए केवल AI पर प्रतिबंध लगाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था को इस व्यापक बदलाव को समझने की जरूरत है।

-(इनपुटः PTI)

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