कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में तपेदिक (टीबी) और फेफड़ों के कैंसर से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई की मदद से इन बीमारियों की शुरुआती पहचान, तेजी से जांच और मरीजों की स्क्रीनिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस विषय पर 22 से 25 अक्टूबर तक जयपुर में आयोजित नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस, इंडिया (NCCP-I) और इंडियन चेस्ट सोसाइटी (ICS) के 28वें संयुक्त वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में विस्तार से चर्चा हुई। इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से 2,000 से अधिक फेफड़ों एवं श्वसन रोग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि एआई श्वसन संबंधी बीमारियों की पहचान और उनके उपचार के तरीके में बदलाव ला सकता है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित उपकरण छाती के एक्स-रे और सीटी स्कैन में संदिग्ध असामान्यताओं की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। इससे डॉक्टरों को आगे की जांच और उपचार के संबंध में तेजी से और बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि श्वसन संबंधी बीमारियों की शुरुआती पहचान के तरीके में बदलाव लाने की एआई में क्षमता है। छाती के एक्स-रे और सीटी स्कैन में संदिग्ध संकेतों की पहचान करके यह तकनीक डॉक्टरों को समय पर जांच कराने और उचित उपचार की दिशा में कदम उठाने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां टीबी और फेफड़ों के कैंसर का बोझ काफी अधिक है, वहां चिकित्सकीय विशेषज्ञता के साथ इस तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे का विश्लेषण कर सकता है और टीबी से जुड़े संकेतों की पहचान कर सकता है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को उन मरीजों को प्राथमिकता देने में मदद मिल सकती है, जिन्हें आगे की जांच की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर वहां जहां विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
दिल्ली स्थित वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा कि एआई की सहायता से छाती के एक्स-रे की स्क्रीनिंग करने से टीबी की पहचान के कार्यक्रमों की पहुंच और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
सम्मेलन में फेफड़ों के कैंसर की पहचान में एआई की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि उन्नत एआई एल्गोरिदम डॉक्टरों को सीटी स्कैन की जांच करने, फेफड़ों में संदिग्ध गांठों की पहचान करने और उन असामान्यताओं को चिह्नित करने में मदद कर सकते हैं, जिनकी आगे जांच जरूरी हो सकती है।
-(इनपुटः आईएएनएस)


